श्री राकेश कुमार
(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)
☆ आलेख # १७९ ☆ देश-परदेश – हमारे जीवन पर सोशल मीडिया के साइड इफ़ेक्ट ☆ श्री राकेश कुमार ☆
सोशल मीडिया अपने आप को समाज का बहुत बड़ा शुभचिंतक मानता है। इसकी पैरवी करने वाले तो ये तक कह देते हैं, कि “सोशल मीडिया ही समाज का वास्तविक आईना है”।
दिल को बहलाने के लिए ख्याल बुरा नहीं है, ग़ालिब! अलग अलग तरह के आईने भी आपकी शक्ल को विभिन्न आकारों में दिखा देते हैं। पतले व्यक्ति को मोटा और मोटे व्यक्ति को पतला बताने वाले आईने हमने भी बहुत देखें हैं।
आज प्रातःकालीन भ्रमण पर एक परिचित के घर के सामने से निकलते हुए, एक पेशे से सेवानिवृत वकील साहब मिल गए, उनके चाय के आग्रह को मना नहीं करते हुए, हम उनके घर चले गए।
उनकी पत्नी टीवी के सामने कापी पेन लेकर बैठी थी। वो बोली अभी दस मिनट सब शांत बैठे रहें, उसके बाद ही चाय की व्यवस्था करूंगी।
टीवी के किसी समाचार चैनल पर भविष्य वक्ता कुछ जानकारी दे रहे थे, वो कॉपी में लिखती जा रही थीं। वकील साहब भी अपनी डायरी में कुछ लिख रहे थे। दस मिनट बाद बड़ी कठिनाई के बाद काग़ज़ के छोटे से कप में एक बड़ी चम्मच की मात्रा के बराबर चाय प्राप्त कर, हम अपने होठ ही गीले कर पाए।
वकील साहब की पुत्री एक बड़े हॉस्पिटल में महिला चिकित्सक हैं। भाभी जी भविष्य वक्ता द्वारा “सिजेरियन ऑपरेशन” के लिए अच्छे समय की जानकारी नोट कर रही थी। उनकी पुत्री उस समय किए जाने वाले ऑपरेशन का अधिक/ विशेष चार्ज, वसूल सकें। वकील साहब भी मुकदमा दायर करने का सबसे बढ़िया समय कौन सा है, की जानकारी बार काउंसिल को प्रतिदिन देते है, ताकि वकील उस विशेष समय के लिए अतिरिक्त राशि फीस के नाम पर लूटी जा सके।
चाय के समय वकील साहब बोले, कल ही बिटिया की सगाई टूट गई है। हमें भी आश्चर्य हुआ, तब वो बोले लड़के वाले कहते है, किसी भी वकील की बेटी से विवाह नहीं करेंगे, वर्ना भोपाल वाली त्रिशा जैसा कुछ हो ना जाए। वो बहुत दुखी मन से बोले, समाज में लोग वकीलों से पारिवारिक संबंध जोड़ने से मना करने लगे हैं। आगे बोले पड़ोस में रहने से भी लोग डरते हैं। वकील के घर के आस पास जमीन भी तो सस्ती मिल जाती है।
बहुत देरी से मुंह में रखे हुआ गुटखा थूकने का समय आ गया है। इसलिए लेखनी को विराम देता हूँ।
© श्री राकेश कुमार
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