डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैंआपकी कविता – हिन्दी बोली ।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # ३३८ – साहित्य निकुंज ☆

☆ हिन्दी बोली ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

☆

 घर की चौखट पर हिंदी वह माँ की बोली

देख रहे हैं आज सभी

हिंदी जा पहुंची

दुनिया की हर टोली

 

मोबाइल हो या लैपटॉप

की स्क्रीन

शब्द वहां मुस्काते हैं

देश हो या विदेश लोग

आज हिंदी में गुनगुनाते हैं।

 

अंग्रेजी के शब्दों के बीच

कहीं नहीं खोई हिंदी

रूप भले ही बदल रहे हैं

 हिंदी जड़े  खोई नहींं

 

शब्द शब्द में भाव बसे

है यही मन का भाव

संस्कृति इसमें रची बसी

यही हमारी छाँव

 

हिंदी आगे बढ़े

और

 नित-नित नए आयाम रचे

हिंदी से हमारी है पहचान

करोड़ों के दिलों में धड़क रहा है हिंदुस्तान।

☆

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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