श्री श्याम खापर्डे
(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “शुभ अशुभ…”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २८२ ☆
☆ # “शुभ अशुभ…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆
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शुभ अशुभ के फेर में
फँसा हर इंसान है
दुविधा में उलझे हुए
उसके प्राण है
इस भ्रमजाल से
मुक्ति पाना मुश्किल है
जन्म से आज तक
वह कर रहा इसका गुणगान है
सामाजिक मान्यताओं में
वह जकड़ा हुआ है
सदियों की परंपराओं को
वह पकड़ा हुआ है
वह चाह कर भी
इससे छुटकारा नहीं पा सकता
वह चाह कर भी
भ्रमजाल से बाहर नहीं आ सकता
उसकी विद्वता
यहां पर निष्क्रिय हो जाती है
उसकी सोच
इस उधेड़बुन में खो जाती है
यह अंधविश्वास है
वह अच्छे से जानता है
फिर भी वह
इस परंपरा को ही मानता है
जब कार्य उसके अनुरूप होते हैं
वह शुभ है
जब कार्य उसके अनुरूप नहीं होते
वह अशुभ है
वह जब अपने
विवेक से सोचता है
सत्य को अपने
जीवन में खोजता है
तब उसे
एक महान विचारक का
कथन याद आता है –
कि
जब तक
सांस चल रही है
सब शुभ है
जो बीत गया
वह कल था
आने वाला कल
एक वरदान है
जब सांस रुक जाती है
तब सब अशुभ है
अपनों के लिए भी
और दुनिया के लिए भी /
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© श्याम खापर्डे
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