श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “माता के दरबार में…”।) 

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २८३ ☆

☆ # “माता के दरबार में…” # ☆ श्री श्याम खापर्डे ☆

चलो दीपक जलाएं

माता के दरबार में

श्रद्धा के सुमन चढ़ाएं

माता के दरबार में

 

नवरात्रि के पावन पर्व पर

नौ रूपों पर गर्व कर

हम भक्ति के पुष्प चढ़ाएं

माता के दरबार में

 

पृथ्वी अंबर डोल रहा है

माता की जय बोल रहा है

भक्त जन जस गा रहे हैं

माता के दरबार में

 

गली चौराहे पर पंडाल खड़ा है

माता पर श्रृंगार चढ़ा है

हर कोई भोग लगा रहा है

माता के दरबार में

 

पाप बढ़ गए हैं संसार में

धार करो मां अपने वार में

ताकि हर पापी शीश नवाएं

माता के दरबार में

 

प्रबल हो गई दुष्ट शक्तियां

लाचार हो गई भक्तों की भक्तियां

इनका संहार करो मां

माता के दरबार में

 

तेरे नाम से शक्तिपीठ है चलते

निर्धन भक्तों को हरदम है  छलते

सब पाखंडियों की हाजिरी लगाओ

माता के दरबार में

 

मन से करो पूजा

नहीं है कोई मार्ग दूजा

अपना सब कुछ दिल से लूटाओ

माता के दरबार में

 

तन मन से जो करता है भक्ति

उस पर प्रसन्न होती है शक्ति

उसको मिलता है प्रसाद

माता के दरबार में /

☆

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

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