श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “आप घर कह रहे जिसे मेरा…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १६९ ☆
आप घर कह रहे जिसे मेरा… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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मैं हूँ आहू की तिश्नगी की तरह
ज़ीस्त सहारा की है नदी की तरह
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आप घर कह रहे जिसे मेरा
जेल की है वो कोठरी की तरह
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एक बच्चे को क़ीमती सबसे
है खिलौनों की टोकरी की तरह
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दोनों तारीफ़ उसकी करते हैं
हम्द है मुझको आरती की तरह
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तुमको तस्लीम आदमी कर लूँ
पेश तो आओ आदमी की तरह
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धूप हो छाँव हो न भूलें हम
रोज़ खिलना है इक कली की तरह
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शे‘र मफ़हूम से न होगा बड़ा
लफ्ज़ गर है न सादगी की तरह
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दोस्त इस्लाह और कुछ भी नहीं
एक कपड़े पै इस्तरी की तरह
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अय अरुण हिज़्र का असर देखो
जनवरी लग रही मई की तरह
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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