डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं आपकी विशेष रचना – भावना के दोहे – पिता।)
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जिनकी ममता को नहीं, सकता कोई तोल।
पिता हमारे है कवच, माता हैं अनमोल॥
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पिता बनाते हैं सदा, बच्चों की तक़दीर।
संकट के हर दौर में, सही हमेशा पीर॥
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पिता शिला आधार की, उनसे ही परिवार।
हौले-हौले आपसे, सीखा शिष्टाचार॥
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पकड़ उंगलियाँ आपने, मुझे दिखाई राह।
साथ हमेशा हों पिता, दिल में रहती चाह॥
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पापा मेरी प्रेरणा, पापा मेरी शान।
पापा से हम सीखते, जीवन का हर ज्ञान॥
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पिता गुणों की खान है, दिया बहुत अवदान।
नाम बहुत साहित्य में, बहुत किया उत्थान…
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पापा मेरे साथ हैं, मैं हूँ बड़ी महान।
साहित्यिक आकाश में, मिली उन्हें पहचान॥
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छंद जगत में आपकी, बनी एक पहचान।
मिलता है साहित्य को, इनका ही अवदान॥
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पिता धरा आकाश हैं, पिता हमारी छाँव।
मुश्किल के हर समय में, पार लगाई नाव॥
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अपनी इच्छा हम कहें, पूरी हों हर बार।
पिता सभी सुख त्यागते, रखा सुखी परिवार॥
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कमी आपकी खल रही, चले गए क्यों दूर।
यादें तडपाती हैं हमें, जीने को मजबूर…
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दूर नहीं हो आज भी, मेरे पापा ख़ास ।
हर पुकार पर हे पिता, आना मेरे पास…
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© डॉ भावना शुक्ल
सहसंपादक… प्राची
प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120, नोएडा (यू.पी )- 201307
मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






