श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’

(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी की सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’ जी द्वारा “व्यंग्य से सीखें और सिखाएं” शीर्षक से साप्ताहिक स्तम्भ प्रारम्भ करने के लिए हार्दिक आभार। आप अविचल प्रभा मासिक ई पत्रिका की  प्रधान सम्पादक हैं। कई साहित्यिक संस्थाओं के महत्वपूर्ण पदों पर सुशोभित हैं तथा कई पुरस्कारों/अलंकरणों से पुरस्कृत/अलंकृत हैं। आपके साप्ताहिक स्तम्भ – व्यंग्य से सीखें और सिखाएं  में आज प्रस्तुत है एक विचारणीय रचना एक पौधा… उम्मीद भरा…। इस सार्थक रचना के लिए श्रीमती छाया सक्सेना जी की लेखनी को सादर नमन। आप प्रत्येक गुरुवार को श्रीमती छाया सक्सेना जी की रचना को आत्मसात कर सकेंगे।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  – आलेख # २६८ ☆ एक पौधा… उम्मीद भरा…

गाँव के बीचों-बीच एक छोटी-सी पगडंडी थी। उस पगडंडी से रोज कई लोग गुजरते थे—कुछ जल्दी में, कुछ थके हुए, और कुछ अपने ही विचारों में खोए हुए। लेकिन वहाँ एक बुजुर्ग महिला रहती थी, जिसका नाम था श्यामली अम्मा।

अम्मा रोज सुबह सूरज निकलते ही एक छोटा-सा पौधा लेकर पगडंडी के किनारे लगा देतीं। फिर उसे थोड़ा पानी डालतीं, थोड़ी माटी थपथपातीं और मुस्कुराकर कहतीं—

“बेटा, बढ़ते रहो… किसी की छाँव बनना।”

एक दिन गाँव के बच्चों ने अम्मा से पूछा,

“अम्मा, आप रोज एक पौधा क्यों लगाती हैं? इससे होगा क्या?”

 

अम्मा ने हँसकर कहा,

“बच्चों, जब मैं नहीं रहूँगी, ये पौधे मेरे शब्द बनकर बोलेंगे…

किसी को छाँव देंगे, किसी को फल देंगे, किसी को ऑक्सीजन देंगे।

एक पौधा सिर्फ पौधा नहीं होता—ये जीवन को बढ़ाने का प्रण होता है।”

 

उनकी बात बच्चों के दिल में उतर गई। अगले दिन बच्चे भी अपने-अपने हाथों में पौधे लेकर आ गए। फिर क्या था—

धीरे-धीरे हर घर से एक व्यक्ति निकलता…

हर हाथ में एक पौधा होता…

और हर मन में एक संकल्प।

 

कुछ महीनों में वही पगडंडी, जो कभी सूनी थी,

अब हरियाली से भर गई।

तितलियाँ उड़ने लगीं, परिंदे चहकने लगे,

और हवा में एक मीठी ठंडक फैल गई।

 

गाँव वालों ने महसूस किया कि

“एक पौधा लगाना छोटा काम नहीं,

ये आने वाली पीढ़ी के लिए दिया गया एक उपहार है।”

 

और आज वह गाँव पूरे इलाके में जाना जाता है—

“एक व्यक्ति, एक पौधा” गाँव।

 

क्योंकि वहाँ हर इंसान जान गया था कि

अगर हर व्यक्ति सिर्फ एक पौधा भी लगा दे…

तो धरती फिर से मुस्कुरा सकती है।

**

©  श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’

माँ नर्मदे नगर, म.न. -12, फेज- 1, बिलहरी, जबलपुर ( म. प्र.) 482020

मो. 7024285788, chhayasaxena2508@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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