श्री राकेश कुमार
(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)
☆ आलेख # १५७ ☆ देश-परदेश – वकील दिवस: 3 दिसंबर ☆ श्री राकेश कुमार ☆
देश के प्रथम राष्ट्रपति स्वर्गीय श्री राजेंद्र प्रसाद जी के जन्मदिवस को अधिवक्ता दिवस के रूप में मनाया जाता है। साधारण भाषा में अधिवक्ता को वकील कह कर संबोधित किया जाता हैं। कानून के हाथ लंबे होते हैं, कानून अंधा होता है, जैसी अनेक किवदंतियां वकीलों से जुड़ी हुई हैं।
वकीलों से बच कर रहना चाहिए कहने वाले तो यहां तक ज्ञान देते हैं, कि वादी और परिवादी वकील के द्वारा कोर्ट में इतने पैसे खर्चवा देते है, उससे अच्छा तो दोनों पक्ष अपनी अपनी पूंजी लेकर जलती हुई आग के समक्ष बैठ कर करेंसी नोट जलाते जाएं, जिसके पैसे पहले समाप्त हो जाए, वो पक्ष हारा हुआ कहलाएगा।
लोग वकील के घर के पास घर भी नहीं लेना चाहते है, डरते हैं, कोई ना कोई झगड़ने का मुद्दा बन जाएगा इसलिए वकीलों के घर के पास प्रॉपर्टी अपेक्षाकृत सस्ती उपलब्ध रहती हैं।
कानून की डिग्री वाले वकीलों के अलावा भी अनेक प्रकार के वकीलों का सामना जीवन में हुआ हैं। मोहल्ले या परिवार के झगड़े सलटाने वाले भी हमारे समाज में पाए जाते हैं।
कार्यालय में कुछ लोग बात बात पर नियम की बात करते हैं, तो लोग उनको भी वकील की संज्ञा से नवाज़ देते हैं। इस प्रकार के लोगों से लोग दूरी बनाना उचित समझते हैं।
दो बिल्लियों की रोटी के एक टुकड़े को लेकर लड़ाई को बंदर वकील सलटा देता है, वाली पुरानी कहानी हम सब ने बचपन में खूब सुनी थीं।
वर्तमान में तो वकील पुलिस तक को डराते हैं। किसी वकील के साथ दुर्घटना हो या किसी वकील ने आपकी गाड़ी को टक्कर भी मारी हो, वकील संगठित होकर सड़कों पर उतर आते हैं।
वकील का पेशा कभी बहुत सम्मानित पेशा होता था, वर्तमान में लोग उनका सम्मान भय के कारण ही करते हैं। न्याय प्रणाली और हमारे न्यायधीश भी इस सब के लिए उतने ही जिम्मेवार है जितने हमारे वकील लोग हैं।
देश के कुछ वकीलों ने समाज के लिए बहुत अच्छा कार्य भी किया है। राष्ट्रीय मुद्दे और गरीबों के लिए भी समय समय पर वकीलों ने पूर्व में बहुत सारे कार्य भी किए गए हैं, जिनको भुलाया नहीं जा सकता हैं।
अब लेखनी को विराम देता हूं, वर्ना आप लोग कहेंगे वकीलों की बहुत वकालत कर रहा हूं।
© श्री राकेश कुमार
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