श्री संजय भारद्वाज
(श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही गंभीर लेखन। शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं। हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं।)
संजय दृष्टि – युद्ध के विरुद्ध…
युद्ध लीलता है ज़िंदगियाँ,
कभी प्रत्यक्ष कभी परोक्ष,
जो चले जाते हैं,
उनके अपने,
लंबे समय तक
संभल नहीं पाते हैं,
जिन बच्चों की
चढ़ जाती है बलि
क्रूर युद्ध में,
उनके माता-पिता
जीते जी मर जाते हैं,
उजड़ जाते हैं मकान,
बिखर जाते हैं मोहल्ले,
सभ्यता को निर्वसन कर
जुलूस निकाला जाता है,
आदमी के अंदर का राक्षस,
पूरी विद्रूपता के साथ
बाहर निकल आता है,
कोई खो देता है हाथ,
कोई पाँव, कोई आँख,
मनुष्य से लेकर
जीव-जंतु, पशु-पक्षी,
हरेक रोने पर विवश होता है,
बची साँसों को
ढोने पर विवश होता है,
उत्सव को चीखों में
बदल देता है यूद्ध,
संहार को सृजन
घोषित कर देता है युद्ध,
पंछियों को दाना खिलाने वाले हाथ,
गिद्धों का भक्ष्य बनने लगते हैं,
आदमी का चोला ओढ़े गिद्ध
शिकार पर निकलने लगते हैं,
सुनो मनुज!
युद्ध कभी
अंतिम विजय नहीं होता,
युद्ध कभी
समस्याओं का अंत नहीं होता,
युद्ध केवल मरण है,
बलात थोपा हुआ मरण,
मरण जीव की नियति तो है
पर जीवन की नीति नहीं हो सकती,
नियति को
नीति सिद्ध करने का प्रयास है युद्ध,
जीव को जीवन से
च्युत करने का अट्टहास है युद्ध,
जीव को
जीवन की राह पर लौटाओ।
हे मनुष्य!
मनुष्य को युद्ध से बचाओ!
© संजय भारद्वाज
(प्रातः 11:37 बजे, 4 मार्च 2026, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा)
अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆
संजयउवाच@डाटामेल.भारत
writersanjay@gmail.com
☆ आपदां अपहर्तारं ☆
गुरुवार 12 मार्च से हमारी आपदां अपहर्तारं साधना आरंभ होगी। यह श्रीराम नवमी तदनुसार गुरुवार दि. 26 मार्च तक चलेगी।
इस साधना में श्रीरामरक्षा स्तोत्र एवं श्रीराम स्तुति का पाठ होगा। मौन साधना एवं आत्मपरिष्कार भी साथ-साथ चलेंगे।
अनुरोध है कि आप स्वयं तो यह प्रयास करें ही साथ ही, इच्छुक मित्रों /परिवार के सदस्यों को भी प्रेरित करने का प्रयास कर सकते हैं। समय समय पर निर्देशित मंत्र की इच्छानुसार आप जितनी भी माला जप करना चाहें अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं ।यह जप /साधना अपने अपने घरों में अपनी सुविधानुसार की जा सकती है।ऐसा कर हम निश्चित ही सम्पूर्ण मानवता के साथ भूमंडल में सकारात्मक ऊर्जा के संचरण में सहभागी होंगे। इस सन्दर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए आप श्री संजय भारद्वाज जी से संपर्क कर सकते हैं।
≈ संपादक – हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




