श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक सहित्य # ४०५ ☆

?  आलेख – ईरान की संस्कृति ? श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆

ईरान की संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृतियों में से एक है। इसे ‘फारसी संस्कृति’ के रूप में भी जाना जाता है, जिसने न केवल मध्य पूर्व बल्कि मध्य एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप के साहित्य, कला और दर्शन पर भी गहरा प्रभाव डाला है।

ईरानी संस्कृति की आत्मा उसकी कविता में बसती है। फारसी साहित्य दुनिया के गौरवशाली साहित्य में गिना जाता है।

महान कवि: फिरदौसी, हाफ़िज़, रूमी और सादी जैसे कवियों की रचनाएँ आज भी विश्वभर में पढ़ी जाती हैं।

शाहनामा: फिरदौसी द्वारा रचित ‘शाहनामा’ ईरान का राष्ट्रीय महाकाव्य है, जो प्राचीन फारस के इतिहास और मिथकों को संजोए हुए है।

कला और वास्तुकला

ईरानी वास्तुकला अपनी भव्यता, ज्यामितीय सटीकता और नीले रंग की टाइलों के काम के लिए प्रसिद्ध है।

इस्फहान की मस्जिदें: इस्फहान शहर को ‘निसफ-ए-जहाँ’ (आधी दुनिया) कहा जाता है, जहाँ की ‘मस्जिद-ए-शाह’ और ‘शेख लुतफुल्ला मस्जिद’ वास्तुकला के बेजोड़ नमूने हैं।

कालीन : ईरानी कालीन दुनिया भर में अपनी बुनाई, रंगों और जटिल डिजाइनों के लिए मशहूर हैं। यह ईरान की एक प्राचीन हस्तकला है।

त्यौहार और परंपराएँ

ईरानी संस्कृति में कई ऐसे त्यौहार हैं जो इस्लाम के आगमन से पहले के हैं और आज भी उतनी ही धूमधाम से मनाए जाते हैं।

नौरोज़ : यह फारसी नव वर्ष है, जो वसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाता है। यह प्रकृति के पुनर्जन्म का प्रतीक है।

शब-ए-यल्द: साल की सबसे लंबी रात  को परिवार के साथ मिलकर फल (विशेषकर अनार और तरबूज) खाकर और कविताएँ पढ़कर मनाया जाता है।

खान-पान

ईरानी भोजन अपने संतुलित स्वाद और सुगंध के लिए जाना जाता है। इसमें केसर, सूखे मेवे, गुलाब जल और अनार का भरपूर उपयोग होता है।

चेलो कबाब: यह ईरान का राष्ट्रीय व्यंजन है, जिसमें सुगंधित चावल (बेरेंज) के साथ ग्रिल्ड कबाब परोसा जाता है।

सब्जी खोरेश: विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियों और मांस से बना स्टू भी यहाँ काफी लोकप्रिय है।

शिष्टाचार: ‘तारोफ़’

ईरानी संस्कृति में ‘तारोफ़’ एक अनूठी सामाजिक शिष्टाचार पद्धति है। यह अत्यधिक विनम्रता और सम्मान दिखाने की कला है, जिसमें अक्सर दुकानदार या मेजबान पहली बार में पैसे लेने से मना कर देते हैं या मेहमान को अत्यधिक सम्मान देते हैं। यह आपसी रिश्तों में कोमलता और सम्मान बनाए रखने का एक तरीका है।

ईरान की संस्कृति प्राचीन परंपराओं और आधुनिकता का एक अनूठा संगम है, जो मनुष्य को सौंदर्य, प्रेम और दर्शन की ओर प्रेरित करती है।

© श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव

समीक्षक, लेखक, व्यंगयकार

ए २३३, ओल्ड मीनाल रेसीडेंसी, भोपाल, ४६२०२३, मो ७०००३७५७९८

readerswriteback@gmail.कॉम, apniabhivyakti@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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