श्री राजेन्द्र तिवारी
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘पांडव और पांच गाँव…‘।)
☆ अभिव्यक्ति # १११ ☆
☆ आलेख – पांडव और पांच गाँव… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆
युद्ध का शंखनाद हो चुका था, दोनों पक्ष, युद्ध की तैयारियां कर रहे थे, तभी भगवान कृष्ण ने, पांडवों से कहा, कि मैं एक बार शांति के लिए, अंतिम प्रयास करना चाहता हूं, ताकि युद्ध ना हो, और उनकी सहमति से वे कौरव राजसभा में पहुंचे. वहां पर सम्राट धृतराष्ट्र द्रोणाचार्य, भीष्म पितामह, सभी लोग उपस्थित थे. भगवान कृष्ण ने सभा में महाराज धृतराष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा, कि पांडवों ने 12 वर्ष का वनवास काट लिया है, और एक वर्ष का अज्ञातवास भी व्यतीत कर लिया है, अब उन्हें उनका राज्य लौटा दिया जाए, युवराज दुर्योधन ने तत्काल खड़े होकर कहा, मैं पांडवों को राज्य नहीं दूंगा, भगवान कृष्ण ने कहा, अगर आधा राज्य ना सही, तो उन्हें केवल पांच गांव ही दे दिए जाएं, वह उन पांच ग्रामों में ही अपना गुजारा कर लेंगे, भगवान कृष्ण ने जो पांच गांव मांगे थे वह पांच गांव हैं,
1, गजप्रस्थ – गाजी खान ने उसका नाम बदलकर गाजियाबाद रख दिया था.
2, तिलप्रस्थ – जिसका नाम मुगलों ने फरीदाबाद रख दिया था.
3, इंद्रप्रस्थ – जिसका नाम दिल्ली किया गया.
4, सोनप्रस्थ – जिसका नाम सोनीपत हो गया था.
4, पानप्रस्थ – जिसे बाद में बदलकर पानीपत कर दिया गया था.
परंतु दुर्योधन ने कहा, मैं सुई की नोक के बराबर भी भूमि पांडवों को नहीं दूंगा, अहंकार बहुत कष्टदायक होता है, सब कुछ नष्ट कर देता है, और यहीं से महाभारत युद्ध की नींव रखी गई, और युद्ध में दुर्योधन दुशासन, सभी कौरव, मारे गए, भीष्म पितामह, द्रोणाचार्य इन सभी का देहावसान हुआ.
युद्ध विनाशकारी होता है, दोनों पक्षों की हानि होती है.
शांति बनाए रखनी चाहिए.
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© श्री राजेन्द्र तिवारी
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