श्री राकेश कुमार
(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)
☆ आलेख # १९३ ☆ देश-परदेश – मीठा ज़हर ☆ श्री राकेश कुमार ☆
हमारे जीवन में किसी सुविधा या शॉर्ट कट आरंभ में तो सरल प्रतीत होता हैं। कुछ समय बीत जाने के पश्चात जब उस सुविधा का शुल्क लग जाता है, या शुल्क में बढ़ोतरी होती है, वो हमें अखरने लगती हैं। इंटरनेट, मोबाइल आदि के साथ भी ऐसा ही हुआ था। जियो ने आरंभ में मुफ्त सुविधा देकर, लत लगा दी थी। बैंक ने भी मुफ्त ए टी एम कार्ड दिए थे, बाद में वार्षिक शुल्क और अब तो सीमा से अधिक उपयोग पर भी जेब ढीली करनी पड़ रही हैं।
उपरोक्त कार्टून यु पी आई द्वारा प्रस्तावित शुल्क को लेकर हैं। एक दशक पूर्व बेरोजगार हुए जेब कतरे अब वापिस आस लगाए बैठे हैं, कब जनता जेब में नगद राशि लेकर बाज़ार में निकलेगी, तब वो पुराने धंधे में लौट आयेंगे। ए टी एम कार्ड आदि आने पर भी दो दशक पूर्व बहुर सारे जेब कतरे भी इस प्रोफेशन को छोड़ कर सोने की चेन खींचने आदि व्यवसाय से जुड़ गए थे।
पुलिस थानों में भी पुराने जेब काटने वालों की फाइल्स रिकॉर्ड रूम से निकलवा ली हैं। मुखबिरों को भी उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए कहा गया हैं। शेयर बाजार के मंजे हुए खिलाड़ी ब्लेड निर्माताओं की कंपनियों में तेज़ी की संभावना लगाए हुए हैं।
यू पी आई में शुल्क लगने के कारण बैंक में कार्यरत लोग भी कुछ परेशान प्रतीत हो रहे हैं। वर्षों तक पेट्रोल पंप, मदिरा विक्रेता, जिंसों के थोक व्यवसाय से जुड़े लोग बहुत अधिक मात्रा में प्रतिदिन करेंसी नोट जमा करवाते थे। बैंकर्स का बहुत सारा समय उनको गिनने या सॉर्टिंग करने में निकल जाता था। कोविड के बाद से ऑनलाइन के कारण प्रतिदिन नगद राशि के उपयोग में बहुत अधिक गिरावट हुई थी। इस कारण बैंकर्स भी थोड़ी राहत महसूस कर रहें थे।
केंद्रीय बैंक को भी अब और अधिक नोट छापने पड़ेंगे, बैंकर्स के यहां भी नगद जमा और भुगतान का कार्य बढ़ेगा। फटे पुराने नोट बदलने के व्यवसाय आदि से जुड़े लोगों का भी अच्छे दिनों का इंतजार समाप्त हो जाएगा।
© श्री राकेश कुमार
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