श्री जगत सिंह बिष्ट
(Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker.)
☆ कथा-कहानी – पहाड़ों में बसा एक परिवार ☆ श्री जगत सिंह बिष्ट ☆
पहाड़ों की गोद में बसा, एक गुमनाम गाँव, जहाँ सुबह की किरणें सबसे पहले पेड़ों की चोटियों को छूती थीं और शाम को सूरज क्षितिज के पीछे धीरे-धीरे ओझल हो जाता था। यहाँ की हवा में एक अनूठी मिठास थी, और मिट्टी में मेहनत की सौंधी सुगंध।
इसी गाँव में, नरपत का परिवार रहता था, जिसकी जड़ें जमीन में गहरी थीं। नरपत के चार बच्चे थे—हीरा, शेर, बाग, और रूप। चारों अपनी-अपनी खूबियों के साथ, मानो एक ही पेड़ की चार मज़बूत शाखाएँ थीं।
सबसे बड़ी, हीरा, का विवाह रूप के साथ हुआ। उनके घर में हँसी-खुशी का माहौल तब और बढ़ गया, जब उनके तीन बच्चे—इंदर, गोपाल, और कुंती—आँगन में खेलने लगे।
हमारी कहानी नरपत के बड़े बेटे शेर की है, जिनकी आँखें सपनों से भरी थीं और कंधों पर परिवार की ज़िम्मेदारी थी। शेर ने अपनी जीवन संगिनी, नंदी का हाथ थामा।
नंदी, दीवान और खिमूली की बेटी थीं, और उनके परिवार में सात भाई-बहन थे—प्रेम, मोहन, चतुर, चंदन, स्वरूप, और चना। नंदी ने इस नए घर में आकर, अपने सरल स्वभाव और स्नेह से एक नई रोशनी भर दी।
🌱नंदी का मायका
नंदी के मायके की कहानी भी कम रोचक नहीं थी। उनके बड़े भाई प्रेम ने गोविंदी से विवाह किया, और उनके यहाँ तीन बेटियों ने जन्म लिया—महेशी, उमा, और उषा।
दूसरे भाई, मोहन, की पत्नी सरस्वती हैं, और उनके चार बच्चे हैं—गोदावरी, सुकुमार, शिव नारायण, और हरेंद्र।
तीसरे भाई, चतुर, ने प्रतिमा के साथ घर बसाया, और उनके पाँच बच्चे हैं—प्रकाश, देवी, लक्ष्मण, धरम पाल, और नर्मदा।
चौथे भाई, चंदन, का विवाह मधुलिका से हुआ, और उनके यहाँ देवेंद्र, इंदिरा, रेखा और अजय ने जन्म लिया।
पाँचवे भाई, स्वरूप, की पत्नी राधा हैं, और उनके तीन बच्चे हैं—संजीव, मंजू, और नरेश। नंदी की बहन चना का विवाह कुंदन के साथ हुआ, और उनके पाँच बच्चे हैं—मधी, चंदन, गोविंदी, सुरेंद्र, और नंदन।
🌱शेर की गृहस्थी
समय के साथ, शेर और नंदी की गृहस्थी बढ़ती गई। उनके घर में हँसी-ठिठोली और चहल-पहल रहने लगी। उनके सात बच्चे हुए—जसवंत, जगत, महेंद्र, गोविंदी, लीला, सरस्वती, और दान। हर बच्चा अपनी अनूठी पहचान के साथ आया, मानो जीवन के अलग-अलग रंग हों।
सबसे बड़े जसवंत ने उम्मेद की बेटी शोभा से विवाह किया। दोनों के जीवन में खुशियों का आगमन हुआ जब उन्हें नितिन और नितेश का आशीर्वाद मिला।
दूसरे बेटे, जगत, ने राधिका को अपना जीवनसाथी बनाया। राधिका के पिता बाग और माता सरस्वती हैं। जगत और राधिका के यहाँ अनुराग ने जन्म लिया, जो उनके परिवार की आँखों का तारा बना।
🌱राधिका का मायका
राधिका का मायका भी रिश्तों से भरा हुआ है। उनके तीन भाई-बहन हैं—रजनी, कुलदीप, और प्रदीप।
सबसे बड़ी, रजनी, का विवाह गजेंद्र के साथ हुआ और उनके दो बच्चे हैं—भानु और श्रृष्टि।
उनके भाई कुलदीप की पत्नी का नाम ज्योति है, जिनके माता-पिता राम और भगवती थे। कुलदीप और ज्योति के दो बच्चे हुए—प्रियंका और गौरव।
राधिका की बहन दीपा का विवाह महेंद्र के साथ हुआ, और उनके तीन बच्चे थे—मेघना, अभिनव और करण।
🌱अनुराग और स्नेहा
अनुराग की जीवन संगिनी स्नेहा बनीं, जो कमल और अंजू की बेटी हैं। स्नेहा का एक भाई भी है, जिसका नाम है रोहन।
उनके पिता कमल का परिवार भी भरा-पूरा है। उनके माता-पिता शिवरतन और सीता थे, और उनके चार भाई-बहन हैं—बिनोद, नरेश, बबीता, और दिनेश।
स्नेहा की माँ अंजू के माता-पिता ओम प्रकाश और लक्ष्मी थे, और उनके भी चार भाई-बहन हैं—पवन, आशा, वेद, और शशि।
🌱शेर की गृहस्थी का विस्तार
तीसरे बेटे, महेंद्र, ने जयश्री के साथ घर बसाया। उनके यहाँ रितु के रूप में एक नन्ही परी आई, जिसने घर के आँगन में किलकारियों की गूँज भर दी।
शेर की तीन बेटियाँ हैं—गोविंदी, लीला, और सरस्वती। तीनों का विवाह बड़े ही धूमधाम से हुआ।
गोविंदी का विवाह प्रह्लाद के साथ हुआ। प्रह्लाद नंदन के बेटे थे। इनके तीन बच्चे हुए—नीरज, दिवस, और विभा।
लीला ने आनंद का हाथ थामा, जो गंगा के बेटे हैं। उनके घर दो बेटियों ने जन्म लिया—भाग्यश्री और तनुश्री।
सरस्वती का विवाह रजत से हुआ, जिनके माता-पिता खीम और भागीरथी थे। सरस्वती और रजत की भी दो बेटियां हैं—गीतिका और युथिका।
सबसे छोटे बेटे, दान, ने भगवती देवी को अपना हमसफ़र बनाया। भगवती, धर्म और लक्ष्मी की बेटी हैं। उनके यहाँ वीरेंद्र ने जन्म लिया, जो इस पीढ़ी की सबसे छोटी कड़ी बनकर आया।
🌱बाग और रूप
नरपत के सबसे छोटे बेटे रूप ने देबुली देवी से विवाह किया। उनके यहाँ बच्चों की किलकारियाँ गूँजती रहती थीं, और उनके दस बच्चे हैं—कौशल्या, चंदन, राधा, शंकर, महेंद्र, लीला, कुसुम, लक्ष्मी, पुष्पा, और गुड़िया।
तीसरे बेटे बाग ने खिमूली देवी को अपनी जीवनसंगिनी बनाया। उनके घर पाँच बच्चों ने जन्म लिया—भूपाल, बहादुर, इंदर, जोगुली, और नंदन।
इस प्रकार, नरपत का परिवार एक विशाल वटवृक्ष की तरह बढ़ता गया, जिसकी जड़ें तो पहाड़ों की मिट्टी में थीं, पर शाखाएँ दूर-दूर तक फैली हुई थीं। हर शादी, हर नया जन्म, और हर रिश्ता इस कहानी में एक नया अध्याय जोड़ता गया, जो आज भी सुनाया जाता है।
यह कहानी सिर्फ नामों और रिश्तों की नहीं है, बल्कि उस प्रेम, त्याग और आपसी सहयोग की है, जिसने इस परिवार को एक मजबूत धागे में बाँध रखा है। यह बताती है कि कैसे एक छोटे से गाँव से शुरू हुआ सफर, पीढ़ियों तक अपनी कहानियों की मिठास फैला सकता है।
♥♥♥♥
© जगत सिंह बिष्ट
Laughter Yoga Master Trainer
A Pathway to Authentic Happiness, Well-Being & A Fulfilling Life! We teach skills to lead a healthy, happy and meaningful life.
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈






