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आध्यात्म / Spiritual – श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – प्रथम अध्याय (9) प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ प्रथम अध्याय अर्जुनविषादयोग ( दोनों सेनाओं के प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन )   अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः । नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः ।।9।। अन्य अनेकों वीर वर , मरने को तैयार मेरे हित कई शस्त्रों के चालन में होशियार।।9।। भावार्थ :  और भी मेरे लिए जीवन की आशा त्याग देने वाले बहुत-से शूरवीर अनेक प्रकार के शस्त्रास्त्रों से सुसज्जित और सब-के-सब युद्ध में चतुर हैं॥9॥   And also many other heroes who have given up their lives for my sake, armed with various weapons and missiles, all well skilled in battle. ।।9।।   © प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’  ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर , जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in मो ७०००३७५७९८   (हम प्रतिदिन इस ग्रंथ से एक मूल श्लोक के साथ श्लोक का हिन्दी अनुवाद जो कृति का मूल है के साथ ही गद्य में अर्थ व अंग्रेजी भाष्य भी प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।)...
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आध्यात्म / Spiritual – श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – प्रथम अध्याय (8) प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ प्रथम अध्याय अर्जुनविषादयोग ( दोनों सेनाओं के प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन ) भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः । अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च ॥ आप,भीष्म,कृप,कर्ण,सब अति उत्कृष्ट आधार अश्वत्थामा,सोम दत्ति औ" विकर्ण सरदार।।8।।   भावार्थ :  आप-द्रोणाचार्य और पितामह भीष्म तथा कर्ण और संग्रामविजयी कृपाचार्य तथा वैसे ही अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्त का पुत्र भूरिश्रवा ॥8॥   “Thyself and Bhishma, and Karna and Kripa, the victorious in war; Asvatthama, Vikarna, and Jayadratha, the son of Somadatta. ॥8॥   © प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’  ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर , जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in मो ७०००३७५७९८   (हम प्रतिदिन इस ग्रंथ से एक मूल श्लोक के साथ श्लोक का हिन्दी अनुवाद जो कृति का मूल है के साथ ही गद्य में अर्थ व अंग्रेजी भाष्य भी प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।)...
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आध्यात्म / Spiritual – श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – प्रथम अध्याय (7) प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ प्रथम अध्याय अर्जुनविषादयोग ( दोनों सेनाओं के प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन )   अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम । नायका मम सैन्यस्य सञ्ज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते ॥ कौरव सेना का वर्णन- अपने पक्ष जो प्रमुख हैं,उन्हें सुनें व्दिज श्रेष्ठ निज सेना के नायकों में , जो परम् विशिष्ट।।7।।   भावार्थ :  हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! अपने पक्ष में भी जो प्रधान हैं, उनको आप समझ लीजिए। आपकी जानकारी के लिए मेरी सेना के जो-जो सेनापति हैं, उनको बतलाता हूँ॥7॥   “Know also,  O  best  among  the  twice-born,  the  names  of  those  who  are  the  most distinguished amongst ourselves, the leaders of my army! These I name to thee for thy information.॥7॥   © प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’  ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर , जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in मो ७०००३७५७९८   (हम प्रतिदिन इस ग्रंथ से एक मूल श्लोक के साथ श्लोक का हिन्दी अनुवाद जो कृति का मूल है के साथ ही गद्य में अर्थ व अंग्रेजी भाष्य भी प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।)...
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आध्यात्म / Spiritual – श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – प्रथम अध्याय (4-6) प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ प्रथम अध्याय अर्जुनविषादयोग ( दोनों सेनाओं के प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन )   अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि । युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः ।।4।।   भीमार्जुन सम वीर है , रण में शूर महान ध्रुपद विराट औ सात्यकी ,धनुधर कुशल समान।।4।।   धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्‌। पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङवः ।।5।।   धृष्टकेतु,चेकितान है, काशिराज बलवान पुरूजित,कुंतीभोज, सब नर श्रेष्ठ,शैव्य समान।।5।।   युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान्‌। सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः ।।6।।   युधामन्यु सा पराक्रमी उतमौजा बलवान अभिमन्यु व द्रौपदी सुत सब रथी महान।।6।।   भावार्थ :  इस सेना में बड़े-बड़े धनुषों वाले तथा युद्ध में भीम और अर्जुन के समान शूरवीर सात्यकि और विराट तथा महारथी राजा द्रुपद, धृष्टकेतु और चेकितान तथा बलवान काशिराज, पुरुजित, कुन्तिभोज और मनुष्यों में श्रेष्ठ शैब्य, पराक्रमी युधामन्यु तथा बलवान उत्तमौजा, सुभद्रापुत्र अभिमन्यु एवं द्रौपदी के पाँचों पुत्र- ये सभी महारथी हैं॥4-6॥   4. “Here are heroes, mighty archers, equal in battle to Bhima and Arjuna, Yuyudhana, Virata and Drupada, of the great car (mighty warriors), 5. “Drishtaketu, Chekitana and the valiant king of Kasi, Purujit, and Kuntibhoja and...
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आध्यात्म / Spiritual – श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – प्रथम अध्याय (3) प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ प्रथम अध्याय अर्जुनविषादयोग ( दोनों सेनाओं के प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन ) पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्‌। व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ॥ दुर्योधन ने कहा (पांडव सेना का वर्णन) योग्य शिष्य,गुरू आपके द्रुपद पुत्र के हाथ व्यूह रचित पांडवों की ,सेना देखें नाथ।।3।। भावार्थ :  हे आचार्य! आपके बुद्धिमान्‌शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न द्वारा व्यूहाकार खड़ी की हुई पाण्डुपुत्रों की इस बड़ी भारी सेना को देखिए॥3॥ Behold,  O  Teacher,  this  mighty  army  of  the  sons  of  Pandu,  arrayed  by  the  son  of Drupada, thy wise disciple! ॥3॥   © प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’  ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर , जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in मो ७०००३७५७९८ (हम प्रतिदिन इस ग्रंथ से एक मूल श्लोक के साथ श्लोक का हिन्दी अनुवाद जो कृति का मूल है के साथ ही गद्य में अर्थ व अंग्रेजी भाष्य भी प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।)...
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आध्यात्म / SPIRITUAL – श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – प्रथम अध्याय (2) – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ प्रथम अध्याय अर्जुनविषादयोग ( दोनों सेनाओं के प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन ) संजय उवाच दृष्टवा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा । आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत्‌॥ संजय ने कहा- पांडव सेना व्यूह रत दुर्योधन ने देख गुरू द्रोण के पास जा बोला बचन विशेष।।2।। भावार्थ :  संजय बोले- उस समय राजा दुर्योधन ने व्यूहरचनायुक्त पाण्डवों की सेना को देखा और द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन कहा॥2॥ Sanjaya said:     Having seen the army of the Pandavas drawn up in battle array, King Duryodhana then approached his teacher (Drona) and spoke these words ॥2॥   © प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’  ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर , जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in मो ७०००३७५७९८ (हम प्रतिदिन इस ग्रंथ से एक मूल श्लोक के साथ श्लोक का हिन्दी अनुवाद जो कृति का मूल है के साथ ही गद्य में अर्थ व अंग्रेजी भाष्य भी प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।)...
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आध्यात्म / Spiritual – श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – प्रथम अध्याय (1) प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ प्रथम अध्याय अर्जुनविषादयोग ( दोनों सेनाओं के प्रधान शूरवीरों की गणना और सामर्थ्य का कथन ) धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः । मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत संजय ॥ धृतराष्ट्र ने (संजय से) पूछा- धर्म क्षेत्र कुरूक्षेत्र में , युद्ध हेतु तैयार मेरों का पांडवों से , संजय ! क्या व्यवहार  ।।1।। भावार्थ :  धृतराष्ट्र बोले- हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित, युद्ध की इच्छावाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?॥1॥ 1 Dhritarashtra said   ..  What did the sons of Pandu and also my people do when they had assembled together, eager for battle on the holy plain of Kurukshetra, O Sanjaya?   © प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’  ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी , रामपुर , जबलपुर vivek1959@yahoo.co.in मो ७०००३७५७९८ (हम प्रतिदिन इस ग्रंथ से एक मूल श्लोक के साथ श्लोक का हिन्दी अनुवाद जो कृति का मूल है के साथ ही गद्य में अर्थ व अंग्रेजी भाष्य भी प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे।)...
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आध्यात्म / Spiritual – श्रीमद् भगवत गीता – पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

श्रीमद् भगवत गीता पद्यानुवाद - प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव 'विदग्ध' प्राक्कथन हर जन-मन पावन बने, सबका हो कल्याण मानव मानव बन सके यह वर दो भगवान।। वर्तमान समय विज्ञान का युग है। भौतिकवाद विश्व में परिव्याप्त है। विज्ञान ने छोटे बड़े विभिन्न यंत्रो और उनके सहयोग से नये-नये उत्पादों को गति दी है बहुमुखी विकास ने प्रखर बाजारवाद को जन्म दिया है। मानव की वृत्ति और रूचि में विकार हो गया है। धन अर्जन और उसके संग्रह तथा संवर्धन की मनोवृत्ति विकसित हुई है। धन का महत्व और प्रभाव बहुत बढ़ गया है पर दुर्भाग्य है कि इसी के परिणाम स्वरूप समाज का चारित्रिक पतन हुआ है। नौतिक मूल्यों का निरंतर ह्नास हो रहा है। धर्म निरपेक्ष राजनीति ने धर्म की उपेक्षा की है अतः धार्मिक भावना पर आघात हुआ हैं मन असंयमित और उच्छृंखल हो गया हैं। नई पीढ़ी के आचरण में पुराना धार्मिक भाव दिखाई नहीं देता । भड़कीले दिखावों की वृद्धि हुई है। सारा वातावरण बदला-बदला है। प्रेम, सहायोग, सद्भाव सहानुभूति, उदारता,...
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