श्री प्रदीप शर्मा
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “सफ़ेद बाल…“।)
अभी अभी # 730 ⇒ सफ़ेद बाल
श्री प्रदीप शर्मा
बाल उगाना तो बच्चों का खेल है, लेकिन उन्हें हमेशा काले बनाए रखना बड़े-बूढ़ों का खेल है। सभी बच्चे अमूमन बाल लेकर पैदा होते हैं, कुछ ज़्यादा तो कुछ कम। बिना बाल के बच्चे कम ही पैदा होते हैं। इसीलिए उन्हें बाल बच्चे कहते हैं।
बच्चों के साथ बाल भी बढ़ते हैं। लड़कों के बाल कटते रहते हैं, लड़कियों के बाल बढ़ते रहते हैं। बाल और नाखून साथ साथ बढ़ते हैं, दोनों में खून नहीं होता। लेकिन जब कोई उखाड़ता है तो दर्द होता है। नाखून घर में काटे जाते हैं, केश, आपले केश कर्तनालय में।।
बहुत से घरों में छुट्टी के दिन बाल दिवस मनाया जाता है। एक समय था जब शिकाकाई और मुल्तानी मिट्टी से महिलाएँ बाल-सेवा में व्यस्त रहा करती थी। रेडियो सीलोन पर लोमा हेयर आयल का विज्ञापन आता था। तब तक शैम्पू का तो जन्म भी नहीं हुआ था। केवल दादियों के बाल सफ़ेद हुआ करते थे। बालों में जुओं और घरों में खटमलों का राज हुआ करता था।
बालों की सुरक्षा शरीर की सुरक्षा का एक प्रमुख अंग है। किसी के सर में एक भी सफेद बाल बुढापे की निशानी समझा जाता था। इसी कारण हाथों में लगने वाली मेंहदी सर पर चढ़ गई। बाज़ार में बालों की सुरक्षा के लिए शैम्पू, कंडीशनर और मॉइस्चराइजर आ गए। इंदौर में एक मॉडर्न लांड्री थी, जो अपनी दुकान के नाम के नीचे डायर्स और ड्राइकलीनर्स भी लिखती थी।।
जब से वॉशिंग मशीन घरों में आ गई कपड़े घरों में ही ड्राई-क्लीन होने लगे और गोदरेज डाई से बाल भी काले होने लगे। बाल डाई करने के बाद किसी भद्र महिला-पुरुष की उम्र का पता ही नहीं चलता। महिलाओं के चेहरे और बालों की सुंदरता के लिए ब्यूटी पार्लर की सेवाएँ ली जाने लगी तो पुरुषों ने भी जेंट्स पार्लर की ओर रुख कर लिया।
जॉनीवाकर का एक मशहूर गीत है -तेल मालिश चम्पी ! सर की मालिश और शरीर की मालिश अब फेशियल और बॉडी मसाज हो गई है। ए के हंगल भी जब मेन्स पार्लर से बाहर आता है तो अपने आप को देवानंद समझता है। बाल काले करने से दुनिया उजली नज़र आने लगती है।।
कुछ ही भाग्यशाली पुरुष ऐसे होते हैं जिन्हें बालों की चिंता नहीं होती। लोग उन्हें मुफ्त ही बदनाम करते हैं कि चिंता से बाल उड़ जाते हैं। महिलाओं के बाल कम उड़ते हैं, जब कि उन पर जिम्मेदारियों का बोझ अधिक होता है।
एक ऐसी मान्यता है कि धूप में बाल सफेद होते हैं। जिनके बाल सफेद होने लगते हैं, वे सफाई देते हैं कि हमने बाल धूप में सफेद नहीं किये। कहाँ किये, कभी नहीं बताते। उन्हें इतना नहीं समझता कि सफेद बाल काले करना तो आसान है लेकिन काले बाल सफेद करना इतना आसान नहीं।।
जिन्हें हम सफ़ेद बाल कहते हैं, उन्हें अंग्रेज़ी में grey hair कहते हैं। सफेद बाल सम्मान का प्रतीक है। लोग सम्मान की आशा तो रखते हैं, लेकिन बूढ़ा नहीं दिखना चाहते। बुढापा विचारों से तो आता ही है, बार बार आईना देखने, और सफ़ेद बाल गिनने से भी आता है।
बाल काले हों, सफेद हों, कोई फ़र्क नहीं पड़ता ! बस दिल काला न हो। सुंदर दिखना और लगना आपका जन्मसिद्ध अधिकार है। अच्छे दिखें, अच्छे लगें, साथ साथ अच्छे बनें भी। जो देखे, बस यही कहे,
अहा ! आप मुझे अच्छे लगने लगे। कितना पुराना गीत है, लेकिन हमेशा जवां ;
अभी तो मैं जवान हूँ,
अभी तो मैं जवान हूँ,
अभी तो मैं जवान हूँ …
© श्री प्रदीप शर्मा
संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर
मो 8319180002
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




