श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “गृह-शांति।)

?अभी अभी # ७५३ ⇒ आलेख – गृह-शांति ? श्री प्रदीप शर्मा  ?

हम जहाँ रहते हैं, उसको घर कहते हैं ! घर को ही गृह भी कहा जाता है। घर वह स्थान होता है, जहाँ हम घर जैसा महसूस करते हैं। जब ऐसा नहीं होता, तब घर कभी कबाड़खाना लगता है तो कभी, कोई अनजान स्थान भी हमें घर जैसा ही लगने लगता है। घर में शांति न मिलने के वैसे तो कई कारण होते हैं, लेकिन ज़्यादा गंभीर स्थिति होने पर बात वास्तु-दोष तक पहुँच जाती है।

जब भी नया घर बनाया जाता है, तो पहले भूमि-पूजन होता है, वास्तु-पूजन होता है, गृह का निर्माण होता है और गृह-प्रवेश के पहले ग्रह-शान्ति होती है।

गृह-प्रवेश के पहले, ग्रह-शान्ति !

जी हाँ। क्योंकि आपके पहले ही वहाँ नवग्रह विराजमान हो जाते हैं।।

कभी आपने रात में तारे गिने हैं !

क्या ग्रह और नक्षत्रों को कभी पहचान पाए हैं। चलिए आसमान की बात छोड़िए, अपनी जनम-पत्री ही देख डालिए। सोम-मंगल, बुध-रवि, गुरु-शुक्र तो छोड़िए, चंद्रमा और राहु-केतु भी आपकी जनम-पत्री में विराजमान है।

और है उस जनम-पत्री में आपका कच्चा-चिट्ठा ! आज जनम लिए बालक का भविष्य-फल। उन ग्रहों के आधार पर अब आपका नामकरण होगा। और तो और आपका भविष्य भी साथ होगा।

कर लो, क्या कर लेते हो?

क्या कहा ! आप ज्योतिष में विश्वास नहीं करते, भाग्य में विश्वास नहीं करते, अपनी जनम-पत्री के ग्रहों से नहीं डरते। आपने बड़ा होकर अपना नाम भी अपनी मर्ज़ी से तोड़-मरोड़ लिया, लेकिन जिस भी घर में शांति से रहना चाहोगे, अपनी मर्ज़ी से भले ही नहीं, पर परिवार-परिजनों, माता-पिता, पत्नी-पुत्र और रायचंदों के विचार-विमर्श के आगे नत-मस्तक हो, गृह-प्रवेश के पहले ग्रह-शान्ति तो करवानी ही पड़ेगी। अपनी ज़िद के पीछे आप घर-वालों की आस्था, श्रद्धा और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते।।

जो पहले वास्तुविद थे, आज आप उन्हें आर्किटेक्ट (architect) कहते हैं। कौन से कोण में क्या किचन होगा और कौन से कोण में आपका बेड-रूम, वह पहले आपको नक्शे में बताएगा। आप नाक-भौं सिकोड़ेंगे, तो विकल्प भी बताएगा, लेकिन घर वही बनाएगा। बाद में शान से भले ही आप कहते फिरें, यह घर मैंने इतने लाख में बनवाया।

गृह और ग्रह से परे भी एक चीज़ है, जिसे मन की शांति कहते हैं।

मन अशांत हुआ तो राहु-केतु और शनि की महादशा शुरू हो जाती है। लो जी ! हमारे उनको तो साढ़े-साती लग गई ! अब कांग्रेस साढ़े-सत्तर साल तक सत्ता से बाहर हो गई। देखा लालू और आसाराम बापू का हाल ! सब ग्रहों की ही दशा है।।

याने हमारे देश में, और घर में शांति का ठेका हमने तांत्रिकों और ज्योतिषियों को दे दिया है।

सब ईश्वर का बनाया हुआ है।

आप नास्तिकों जैसी बातें नहीं कर सकते। इंदिरा के समय में भी उनके गुरु धीरेन्द्र ब्रह्मचारी थे। आनंदमयी माँ में भी उनकी श्रद्धा थी। नरसिंहाराव और चंद्रशेखर जैसे कई राजनेताओं के गुरु तांत्रिक चंद्रास्वामी रहे हुए हैं। यह आस्था और विश्वास का मामला है जी।

हमारे धर्म, आस्था और विश्वास की जड़ें बहुत गहरी हैं। हम कब अपने गृह को आसमान के ग्रहों से मुक्ति दिला पाएँगे, कब तक नौकरी और बच्चा न होने पर पत्रिका लेकर ज्योतिषी के घर के चक्कर लगाएंगे ! पितृ-दोष और काल-सर्प दोष के निवारण के लिए कभी उज्जैन तो कभी त्रयम्बकेश्वर की परिक्रमा लगाएंगे।।

वाकई हमारा देश चमत्कारों का देश है ! सभी विसंगतियों के बाबजूद अनूठा, निराला, अद्भुत !

असहमति, सहमति के बीच, तमाम संकल्प-विकल्पों के चलते, हम अपनी राह निकाल ही लेते हैं। आसमान में बैठे, हमारे जनम-पत्री में जमे समस्त ग्रहों की परवाह न करते हुए गृह की शांति का आनंद भी लेते चले आ रहे हैं। न चेहरे पर कोई शिकन, न तनाव। शायद इसे ही कहते हों,

सब का साथ,

आपका विकास . . .!!!

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments