श्री प्रदीप शर्मा
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “एस्प्रो, एनासिन और सेरिडोन…“।)
अभी अभी # ७६१ ⇒ आलेख – एस्प्रो, एनासिन और सेरिडोन
श्री प्रदीप शर्मा
बुखार, सरदर्द, सर्दी जुकाम और हाथ पाँव टूटना मानव शरीर का धर्म है। इन्हें दैहिक ताप कहा गया है। समय के साथ इन्हें बीमारियों के साथ जोड़ा जाता है, इनको नए नए नाम दिए जाते हैं। ऐसा कहा जाता है, मच्छरों के काटने से मलेरिया हो जाता है। अधिक शारीरिक परिश्रम, मानसिक थकान इत्यादि से हाथ पाँव में टूटन और जुकाम से सरदर्द भी हो सकता है।
आवश्यकता आविष्कार की जननी है। चिकित्सा विज्ञान में भी आविष्कार हुए। आयुर्वेद, यूनानी और होमियोपैथी चिकित्सा के साथ ही साथ अंग्रेज अपने साथ अंग्रेजी दवा भी लेते आए। कई घरों में आज भी प्राकृतिक चिकित्सा पर ही जोर दिया जाता है। लेकिन बीमारियां हैं कि बढ़ती ही जाती हैं, और उन्हें नए नए नाम दे दिए जाते हैं। ।
एस्प्रो, एनासिन और सेरिडोन की तिकड़ी, पुरानी भारतीय क्रिकेट टीम के स्पिन गेंदबाज, प्रसन्ना, वेंकटराघवन और चंद्रशेखर की याद ताजा कर देती हैं। इन गेंदबाजों की तिकड़ी ने मिल जुलकर कितने डंडे उखाड़े, इनके कारण कितने विदेशी बल्लेबाजों को बुखार आया, सरदर्द हुआ, इतिहास गवाह है।
तब ना तो घरों में टी. वी. था, और ना ही लोगों के हाथ में मोबाइल।
सभी विज्ञापन रेडियो, अखबारों और पत्रिकाओं के माध्यम से लोगों की जबान पर चढ़ जाते थे। एक और जबरदस्त माध्यम था विज्ञापन का, सिनेमाघर का विशाल परदा, जहां डॉक्यूमेंट्री फिल्म के साथ साथ इन दवाओं की तिकड़ी यानी एस्प्रो, एनासिन और सेरिडोन के विज्ञापन प्रसारित होते थे। अच्छी और खराब फ़िल्म से इन दवाओं का भी व्यापार घटता बढ़ता रहता था। तब एस्प्रो की गोली को टिकिया बोलते थे। ।
नर्सरी राइम्स की तरह इन दवाओं के विज्ञापन बच्चे बच्चे की जुबान पर रटे हुए थे। सर्दी जुकाम में, एस्प्रो देता है आराम। सर का दर्द भगाता है, दर्द बदन का जाता है। एस्प्रो ले लो, ले लो एस्प्रो ! और उसके बाद अमीन सयानी की राहत भरी आवाज़। सेरिडोन के चार फायदे चार उंगलियों के माध्यम से गिनाए जाते थे। सरदर्द, बुखार, जुकाम और बदन दर्द। एक गोली में सब गायब।
आजकल वैक्सीन का दौर चल रहा है। क्रिकेट की स्पिन तिकड़ी की तरह लोग इस संकट मोचक तिकड़ी को भी भूल गए हैं। अब इस तिकड़ी को नया नाम दिया गया है, पैरासिटामोल। साधारण भाषा में क्रोसिन पैन रिलीफ और फिर जितनी ऊँची दुकान, उतने ही महंगे पकवान।
अगर बुखार उतर नहीं रहा है तो डेंगू, चिकनगुनिया की आशंका के चलते पहले खून की जांच भी जरूरी हो जाती है।
इस तिकड़ी की पुरानी सहेली सेरिडोन को वापस विज्ञापन में देखकर बचपन के दिन याद आ गए। एस्प्रो ले लो, ले लो एस्प्रो।
© श्री प्रदीप शर्मा
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