श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
(प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ जी के साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक साहित्य ”  में हम श्री विवेक जी की चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, मुख्यअभियंता सिविल  (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी , जबलपुर ) से सेवानिवृत्त हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है। आपको वैचारिक व सामाजिक लेखन हेतु अनेक पुरस्कारो से सम्मानित किया जा चुका है।आज प्रस्तुत है आपकी विदेश यात्रा के संस्मरणों पर आधारित एक विचारणीय आलेख – ”न्यू जर्सी से डायरी…”।)

? यात्रा संस्मरण ☆ न्यू जर्सी से डायरी… 4 ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ?

जेट लेग…न्यू जर्सी

भारत से अमेरिका की यात्रा , मतलब हमारे बनाए गए समय के अनुसार जिंदगी के साढ़े दस घंटे दोबारा जीने का मौका होता है । टाइम जोन का परिवर्तन । पूर्व से पश्चिम की यात्रा । हिंदू तो सदैव पूर्व के उगते सूरज को नमन करते हैं किंतु चूंकि काबा मक्का मदीना भारत से पश्चिम की ओर है इसलिए हमारे जो मुस्लिम भाई भारत में पश्चिम दिशा को पवित्र मानते हैं , वे भी यहां आकर अपनी इबादत पूर्व की ओर ही नमन करके करते हैं, क्योंकि यहां से मक्का मदीना पूर्व दिशा में ही है।

दरअसल जेटलेग और कुछ नही प्रकृति के साथ शरीर का सामंजस्य बैठना ही है । यह एक मानसिक अवस्था है। खास तौर पर नींद के समय को प्रारंभिक कुछ दिन लोग जेट लेग की समस्या से परेशान रहते हैं । मैंने देखा है की जब अल्प समय के लिए मैंने टाइम जोन पार किया और कोई आवश्यक काम रहा तो दिमाग अलर्ट मोड पर आकर प्राथमिकता के अनुरूप नीद एडजस्ट कर लेता है । पर जब रिलेक्स मूड हो तो यह नींद रात रात रंग दिखाती है। मौसम का परिवर्तन आबोहवा में घुला होता है । नींद न आए तो विचार आ जाते हैं, यादो के पुलिंदे, समस्या और समाधान के बादल मंडराते हैं । अभी भी यहां जर्सी में नर्म बिस्तर पर उलट पलट रहा हूं, तो सोचा लिख ही डालूं जेट लेग पर । अपनी बाडी क्लाक को प्रकृति से मिलाकर रिसेट करने का श्रेष्ठ तरीका है सूरज, धूप, सुबह से दोस्ती । बस घुमने निकल पड़िए भुंसारे ।

विवेक रंजन श्रीवास्तव, न्यूजर्सी

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈

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