श्री संतोष नेमा “संतोष”
(आदरणीय श्री संतोष नेमा जी कवितायें, व्यंग्य, गजल, दोहे, मुक्तक आदि विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं. धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार आपको विरासत में मिले हैं. आपके पिताजी स्वर्गीय देवी चरण नेमा जी ने कई भजन और आरतियाँ लिखीं थीं, जिनका प्रकाशन भी हुआ है. आप डाक विभाग से सेवानिवृत्त हैं. आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। आप कई सम्मानों / पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत हैं. “साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष” की अगली कड़ी में आज प्रस्तुत है आपका एक – गीत – नारी का सम्मान करें हम… । आप श्री संतोष नेमा जी की रचनाएँ प्रत्येक शुक्रवार आत्मसात कर सकते हैं।)
☆ साहित्यिक स्तम्भ – इंद्रधनुष # ३०१ ☆
☆ गीत – नारी का सम्मान करें हम… ☆ श्री संतोष नेमा ☆
☆
नारी का सम्मान करें हम |
दिल से गौरवगान करें हम ||
साथ खड़े हों हर अवसर पर,
जगजाहिर पहचान करें हम ||
*
सदियों से हम जिसे पूजते |
सुख-दुख जिसके साथ बाँटते ||
धर्मशास्त्र गाते यश-गाथा,
नतमस्तक हम वंदन करते ||
हक़ के लिए विधान करें हम |
नारी का सम्मान करें हम |
*
एक तिहाई भागीदारी |
विपक्षियों ने ना स्वीकारी ||
संसद में प्रस्ताव गिराया,
महिलाओं में गुस्सा भारी ||
मत इनके संसद में गूँजें |
अब इसका संज्ञान करें हम ||
नारी का सम्मान करें हम |
*
जिसने हक इनका ठुकराया |
उन्हें समय ने सबक सिखाया ||
धैर्य – धर्म इनका पहचानें,
किसने इनका मान घटाया ||
अपने दुश्मन को पहचानें |
कभी न अब अपमान करें हम ||
नारी का सम्मान करें हम |
*
साथ समय के सदा खड़ी है |
हर मुश्किल से सदा लड़ी है ||
छेड़ें मत “संतोष” इन्हें अब,
इनकी जग में आन बड़ी है ||
देती हैं ये सबको इज्जत |
बस इसका भी भान करें हम ||
नारी का सम्मान करें हम |
☆
© संतोष कुमार नेमा “संतोष”
वरिष्ठ लेखक एवं साहित्यकार
आलोकनगर, जबलपुर (म. प्र.) मो 7000361983, 9300101799
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈



