सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’
(लेखन-प्रकाशन – गत 2022 से छंद लेखन, एकल प्रकाशन– कलम के नवांकुर, अनुग्रह नवप्रस्तारित छंद पर लेखन (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), साझा संकलन – तकरीबन 10, द्वादश ज्योतिर्लिंग (लंदन बुक आफ रिकार्ड), अनेकता में एकता (एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड), छंदावली – (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), महाकाल साहित्य सम्मान से सम्मानित। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता !!प्रगति!!)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सविता साहित्य # ३ ☆
☆ !!प्रगति!! ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆
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लक्ष्य करें निर्धारित पहले, नींद त्याग कर जब जागे।
चले प्रगति की राहों पर तब, बढ़े सदा मानव आगे।।
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शुभ विचार धारण करके मन, क्षमता का विस्तार करे।
लड़ना है मुश्किल से डटकर, साहस अपने हृदय भरे।।
कदम -कदम जो आज चलेगा, वही दौड़ के कल भागे।
चले प्रगति की राहों पर तब, बढ़े सदा मानव आगे।।
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निशा भले काली हो कितनी, सूर्योदय से मिट जाती।
पार करे जब चट्टानों को, नदी तभी सागर पाती।।
करें सामना बाधाओं का, सुप्त भाग्य फिर उठ जागे।
चले प्रगति की राहों पर तब, बढ़े सदा मानव आगे।।
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भिन्न-भिन्न पहलू जीवन के, प्रतिपल आते जाते हैं।
जाना है किस ओर हमें ये, हरपल ही भरमाते हैं।।
उलझाते रहते हैं हरदम, रेशम बंधन के धागे।
चले प्रगति की राहों पर तब, बढ़े सदा मानव आगे।।
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© सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु”
झालरापाटन राजस्थान
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





