श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “छू के फूलों से बदन को देखू…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १६७ ☆
छू के फूलों से बदन को देखू… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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लाख मशगूल हों फ़ुर्सत होगी
आपको जब भी ज़रूरत होगी
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बच यहाँ सकते गुनाहों से तुम
एक ऊपर भी अदालत होगी
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ऐब आयें न नज़र फिर उसके
आपको उससे जो निस्बत होगी
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ख़ैर-अंदेश रिआया की बने
कब मुआफ़िक ये हुक़ूमत होगी
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छू के फूलों से बदन को देखू
आपकी जब भी इजाज़त होगी
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साथ मज़लूम के जो होगें खड़े
उनमें ही अस्ल जसारत होगी
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दिल मेरा लेके अगर बदलोगे
ये अमानत में ख़यानत होगी
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उसको कैसे मैं कहूँ ज़िंदा है
ख़ून में जब न हरारत होगी
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ऐ अरुण होगी जमीं जन्नत सी
ख़त्म जब सबकी अज़ीयत होगी
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© श्री अरुण कुमार दुबे
सम्पर्क : 5, सिविल लाइन्स सागर मध्य प्रदेश
मोबाइल : 9425172009 Email : arunkdubeynidhi@gmail. com
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈







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