☆ सूचनाएँ/Information ☆
(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)
दुबई से ~ महिला काव्य मंच, दुबई द्वारा कार्यक्रम ‘मन से मंच’ तक आयोजित ~
साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
सारस्वत रिश्ते वसुधैव कुटुंबकम् वाले होते हैं। शब्द आत्मीयता के आधार कुटुंब हैं। दुबई में मेरे आगमन की सूचना श्रीमती स्नेहा देव जी तथा श्री नितिन उपाध्ये जी को हुई, तो १५ नवम्बर २०२५ की शाम स्नेहा जी के आवास पर पंजीकृत संस्था महिला काव्य मंच (मन से मंच तक) के तत्वावधान में एक काव्य गोष्ठी रखी गई। मेरे अतिरिक्त सिंगापुर से अनुसुइया साहू जी, विश्व साहित्य सेवा संस्थान का भी आगमन दुबई हुआ है।
डाक्टर दंपति अनिल सक्सेना जी जिनकी खासियत ‘किडनी आधारित चित्रांकन’ और ‘कराओके सिंगिंग’ है, ने रात्रि भोज का आयोजन उनके आवास पर किया था। गोष्ठी में ‘किताबवाली नूपुर’ (यह उनके बुक रिव्यू यू ट्यूब चैनल का नाम है), मार्मिक कविता के लिए जाने जानेवाले हरीश खत्री, तरन्नुम में गज़ल की हस्ताक्षर कौसर भुट्टो जी, केतकी जी, रेखा जी, संगीता जी, हिंदी और अरबी के साहित्य के प्रकाशक व्यास जी सहित कई साहित्यिक मित्रों से आत्मीय भेंट हुई। कविताएं सुनी, सुनाई। फिल्मी गीत भी गाये गए।
सुस्वादु भोजन हेतु डाक्टर श्रीमती सक्सेना का धन्यवाद। कुल जमा एक अंतरराष्ट्रीय अद्भुत साहित्यिक काव्य तथा विमर्श का आयोजन रहा।
हमने सुनाया..
☆ सारस साइबेरिया के… ☆
कल आये थे
सारस साइबेरिया के
मेरे घर के सामने की झील पर
बिना वीसा बिना पासपोर्ट
तुम्हारी सरहदों से होकर .
उन्हें यहां आने से रोक नहीं सकती
कोई
एक रंग में रंगी सेना या किसी पूर्वाग्रह से ग्रस्त सरकार .
तुम सिर्फ
कागजो के नक्शे पर
लकीरें सुर्ख कर
सीमायें बना सकते हो
अकारण जेहाद के फितूर में
उगा सकते हो
नई नई सरहदें
सरहदों पर कटीले तार
चौकियां और बंकर
निगरानी कर सकते हो
ड्रोन और सेटेलाइट से
पर क्या तुम
रोक सकते हो ?
धूप हवा और बादलो की आवाजाही
सीमा पार उगे वृक्ष की
इस पार पड़ती परछाई
इधर बजते संगीत की
उस पार गूंजती स्वर लहरियां
नहीं रोक सकते
मेरी कवितायें
जो समेटने को आतुर हैं
सारी सृष्टि को
अपनी बाहों में
साइबेरिया के सारसो का संदेश है
वसुधैव कुटुम्बकम .
साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’, दुबई से
vivek ranjan Shrivastava
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





