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(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

बाल साहित्य संवर्धन संस्थान, कानपुर का सातवाँ वार्षिक सम्मान समारोह संपन्न ☆ रिपोर्ट : श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆

राष्ट्रबंधु की स्मृति में शब्दों का उत्सव 

कानपुर, 16 नवम्बर 2025। राम जानकी मंदिर सभागार, बर्रा-2 उस समय साहित्यिक चेतना से स्पंदित हो उठा जब बाल साहित्य संवर्धन संस्थान, कानपुर ने श्रद्धेय डॉ. श्रीकृष्ण चन्द्र तिवारी ‘राष्ट्रबंधु’ की पावन स्मृति में अपना सातवाँ वार्षिक सम्मान समारोह आयोजित किया। यह आयोजन केवल पुरस्कार वितरण का औपचारिक उत्सव नहीं था, अपितु भाव-संवेदना और शब्द-साधना का एक अनुपम पर्व बन गया, जहाँ शब्दों के माध्यम से मानवता की कोमलता और बालमन की निर्मलता का उत्सर्जन हुआ।

समारोह की अध्यक्षता श्री एस.बी. शर्मा, महामंत्री, भारतीय बाल कल्याण संस्थान, कानपुर ने की। मुख्य अतिथि डॉ. हरिभाऊ खांडेकर, विभागाध्यक्ष (हिन्दी), डी.बी.एस. कॉलेज, कानपुर रहे। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. प्रेम स्वरूप त्रिपाठी (सम्पादक, ‘दि अंडरलाइन’ पत्रिका, कानपुर), संस्था प्रमुख श्री अनिल अवस्थी, श्री भारत तिवारी (डॉ. राष्ट्रबंधु जी के सुपुत्र), डॉ. विनोद त्रिपाठी तथा डॉ. नागेश पांडेय ‘संजय’ आदि प्रमुख थे। विद्वानों से सुशोभित मंच और वरिष्ठ साहित्यकारों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमामयी ऊँचाई प्रदान की।

प्रथम सत्र : श्रद्धा के साथ सृजन का शुभारंभ

प्रथम सत्र का संचालन प्रसिद्ध कवि श्री चक्रधर शुक्ल ने अपनी अनूठी, चुटकीले हास्य और काव्यपूर्ण भाव-भंगिमा से भरपूर शैली में किया। माँ सरस्वती के पूजन और मधुर सरस्वती वंदना के पश्चात् वातावरण में अध्यात्म और साहित्य का सुन्दर सामंजस्य घुल गया। स्वागत भाषण में श्री अजीत सिंह राठौर ने संस्था की सात वर्षों की प्रगति यात्रा का भावपूर्ण विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा, “बाल साहित्य सृजन केवल लेखन नहीं, बल्कि भविष्य के संस्कारों की नींव रखने का पुनीत कार्य है।”

सम्मान समारोह : सृजनशील आत्माओं का सादर सम्मान

डॉ. श्रीकृष्ण चन्द्र तिवारी ‘राष्ट्रबंधु’ की स्मृति में प्रदत्त तेरह सम्मानों से देशभर के प्रतिभाशाली बाल साहित्यकारों को उनके विशिष्ट योगदान हेतु अलंकृत किया गया। प्रत्येक सम्मान के साथ सृजन की गरिमा, सरस्वती की कृपा और रचनाकार की समर्पित भावना स्पष्ट झलक रही थी।

इस सत्र की अध्यक्षता श्री एस.बी. शर्मा तथा मुख्य अतिथि डॉ. हरिभाऊ खांडेकर ने की। विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ. नागेश पांडेय ‘संजय’, वरिष्ठ बाल साहित्यकार-समीक्षक डॉ. प्रेम स्वरूप त्रिपाठी आदि ने मंच की शोभा बढ़ाई। सम्मानित साहित्यकार निम्नलिखित हैं :

  1. कीर्तिशेष पंडित सन्त कुमार बाजपेयी (गोला गोकर्णनाथ, खीरी) – पंडित कृष्ण दत्त शुक्ल बाल साहित्य सम्मान (गंभीर, संस्कारित भाषा एवं बाल मनोविज्ञान पर केन्द्रित रचनाओं के लिए, मरणोपरांत)
  2. सुश्री सृष्टि पांडेय (शाहजहाँपुर) – स्मृतिशेष श्रीमती शिव देवी त्रिपाठी बाल साहित्य सम्मान (कल्पनाशील नारी स्वर एवं नवपीढ़ी के संवेदनशील चित्रण हेतु)
  3. श्री प्रेम सिंह राजावत (आगरा) – स्मृतिशेष शैलजीत सिंह राठौर बाल साहित्य सम्मान (कथा-साहित्य में भारतीय संस्कारों की उज्ज्वल प्रस्तुति हेतु)
  4. श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ (नीमच, मध्य प्रदेश) – कीर्तिशेष पंडित राम किशोर त्रिपाठी बाल साहित्य सम्मान (बाल मन की गहराई एवं सरल भाषा में गहन विचार व्यक्त करने की अप्रतिम क्षमता हेतु, सपत्नीक)
  5. डॉ. वेद प्रकाश अग्निहोत्री (गोला गोकर्णनाथ) – स्मृतिशेष श्रीमती भगवती देवी प्रजापति बाल साहित्य सम्मान (शैक्षणिक दृष्टिकोण एवं नीतिप्रधान कथा-लेखन हेतु)
  6. श्रीमती अनीता गंगाधर शर्मा (अजमेर) – कीर्तिशेष पंडित सत्य नारायण शुक्ल बाल साहित्य सम्मान (बाल काव्य में लोकगंध एवं सरल भावनाओं की सुन्दर प्रस्तुति हेतु, श्री सलीम स्वतंत्र द्वारा ग्रहण)
  7. श्री सुशील पांडेय (कानपुर) – स्मृतिशेष श्रीमती विद्या बाजपेयी बाल साहित्य सम्मान (बाल कहानियों में हास्य-रस एवं मूल्यपरक शिक्षण शैली हेतु)
  8. डॉ. कुसुम चौधरी (बाराबंकी) – स्मृतिशेष श्रीमती राजेश्वरी गुप्ता बाल साहित्य सम्मान (भावनात्मक बोध एवं संस्कारपरक सरोकारों हेतु)
  9. श्री राम दुलार सिंह पराया (मिर्ज़ापुर) – कीर्तिशेष राजेन्द्र सिंह राजावत बाल साहित्य सम्मान (ग्रामीण परिवेश के बच्चों के यथार्थपरक चित्रण हेतु)
  10. श्री सलीम स्वतंत्र (कोटा, राजस्थान) – कीर्तिशेष अविरल बाजपेयी बाल साहित्य सम्मान (राष्ट्रीय एकता एवं सौहार्द के भावों हेतु)
  11. श्री लाल देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव (बस्ती) – स्मृतिशेष राजेश्वरी देवी अवस्थी बाल साहित्य सम्मान (लोककथात्मक शैली एवं नैतिक दृष्टि हेतु)
  12. इंजीनियर संतोष कुमार सिंह (मथुरा) – कीर्तिशेष आचार्य त्रयंबक प्रसाद शुक्ल बाल साहित्य सम्मान (विज्ञान एवं मानवीय मूल्यों का सुगम समायोजन हेतु)
  13. श्री रमेश आनंद (आगरा) – स्मृतिशेष किशन दुलारी बाल साहित्य सम्मान (हास्यप्रधान एवं शिक्षाप्रद बाल कविताओं हेतु) दिया जाना था। मगर वे किसी कारण से उपस्थित नहीं हो पाए।

श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती गीता क्षत्रिय का संयुक्त सम्मान साहित्यिक परिवार की भावनात्मक एकता का प्रतीक बन गया। प्रत्येक सम्मान के साथ सभागार तालियों से गूँज उठा।

द्वितीय सत्र : बाल काव्य की मधुर गूँज

द्वितीय सत्र की अध्यक्षता श्री अनिल अवस्थी ने की। संचालन कवि श्री उदय नारायण ‘उदय’ ने सौम्य एवं सुमधुर स्वर में किया। बाल काव्य पाठ में बच्चों की मासूमियत, देशभक्ति और स्वप्निल उड़ान ने सभी को मुग्ध कर दिया। निर्णायक मंडल में श्री उपेन्द्रनाथ शुक्ल, श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ एवं श्री अजय सिंह राठौर आदि शामिल थे। सभी निर्णय को द्वारा दिए गए अंकों के आधार पर बाल कवियों को उनके भाव, भाषा, भंगिमा, लय, ताल, शैली, उनके बोलने के आत्मविश्वास आदि के आधार पर उन्हें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान दिया गया। इसमें प्रथम स्थान आराध्या मिश्रा को प्राप्त हुआ। द्वितीय स्थान युवान पांडेय ने प्राप्त किया। तृतीय स्थान पर अभिज्ञा सारस्वत रही। जिन्हें प्रमाण पत्र, नगद राशि और माल्यार्पण करके उनकी हौसला अफजाई करके प्रोत्साहित किया गया।

इस सत्र में नवसृजित पुस्तकों का लोकार्पण भी हुआ : 

  • चिर्रो रानी आओ जी – संत कुमार बाजपेयी ‘संत’ 
  • मेढक जी को चढ़ा बुखार – इंजी. संतोष कुमार सिंह 
  • गिट्टी फोड़ – डॉ. अजीत सिंह राठौर 
  • धरती हमें बचानी होगी – कैलाश बाजपेयी 
  • कुट-कुट चिड़िया एवं चली लोमड़ी दावत खाने – डॉ. मंजु लता श्रीवास्तव 

ये रचनाएँ बाल मन की उजली परतों को उघाड़ती प्रतीत हुईं, मानो साहित्य सहजता में संस्कार के बीज बो रहा हो।

समापन : आभार, आदर और नई आशा

अध्यक्ष श्री एस.बी. शर्मा ने कहा, “बाल साहित्य के बिना कोई समाज अपनी संवेदनशीलता को जीवित नहीं रख सकता; यही वह माध्यम है जो हमें हमारे मूल संस्कारों से जोड़े रखता है।” मुख्य अतिथि डॉ. हरिभाऊ खांडेकर ने ऐसे आयोजनों की निरंतरता पर बल देते हुए कहा कि ये कार्यक्रम साहित्यकारों और बच्चों को प्रोत्साहित करने का उत्तम माध्यम हैं।

महासचिव श्री राजकुमार सचान ने संस्था की प्रगति-रिपोर्ट प्रस्तुत कर धन्यवाद ज्ञापित किया और इसे राष्ट्रबंधु जी की आत्मा को साक्षी मानकर बाल साहित्य के पुनर्जागरण का अवसर बताया।

प्रथम सत्र का संचालन श्री चक्रधर शुक्ल, द्वितीय सत्र का श्री रमेश मिश्र ‘आनंद’ ने किया। श्री कैलाश बाजपेयी, डॉ. ओमप्रकाश शुक्ल ‘अमिय’, श्री राजीव मिश्रा, डॉ. जयप्रकाश प्रजापति, श्री भारत तिवारी, श्रीमती सीता सचान तथा कार्यकारिणी के सभी सदस्यों का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा।

सांझ ढलते-ढलते जब सभागार से बाल-साहित्य प्रेमी और दर्शक निकले, तो उनकी आँखों में साहित्य के प्रति नई श्रद्धा और हृदय में राष्ट्रबंधु जी की स्मृति का उजास स्पष्ट झलक रहा था। लगा जैसे बाल साहित्य ने एक बार फिर बचपन की सरलता, सहजता और मनुष्यता के मीठे स्वर को जीवित कर दिया हो।

रिपोर्ट : श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’

17 नवम्बर 2025

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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ओमप्रकाश क्षत्रिय 'प्रकाश'

बहुत ही शानदार प्रस्तुतीकरण।