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(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)
डॉ. निशा अग्रवाल
यूपी व सीबीएसई पाठ्यपुस्तकों में शामिल हुए डॉ. निशा अग्रवाल के निबंध एवं रचनाएं – अभिनंदन
शिक्षा जगत में गौरव का क्षण
नई शिक्षा नीति व समकालीन विषयों पर आधारित लेखन को मिला व्यापक स्थान
शिक्षा जगत के लिए यह गौरव का विषय है कि जयपुर की प्रख्यात शिक्षाविद् एवं पाठ्यपुस्तक लेखिका डॉ. निशा अग्रवाल की रचनाओं को माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश द्वारा निर्धारित नवीन पाठ्यक्रम के अंतर्गत कक्षा 9 से 12 की सामान्य हिंदी पाठ्यपुस्तकों में शामिल किया गया है। इन रचनाओं में निबंध, गद्यांश, पद्यांश, संस्मरण एवं अन्य शैक्षणिक विषयवस्तु को स्थान मिला है। नगीन प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इन पुस्तकों का संपादन वरिष्ठ लेखक सर्वेश कांत वर्मा ने किया है। इसके अतिरिक्त, सीबीएसई बोर्ड के पाठ्यक्रम के अंतर्गत कक्षा 9 एवं 10 की हिंदी व्याकरण की पुस्तकों में भी उनकी विषयवस्तु को सम्मिलित किया गया है।
डॉ. निशा अग्रवाल के चर्चित निबंध ‘नई शिक्षा नीति’ तथा ‘शिक्षित बेरोजगारी’ समकालीन शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण पक्षों को सरल, सटीक एवं प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत करते हैं। इन रचनाओं में नई शिक्षा नीति के उद्देश्य, प्रमुख तत्व, प्रभाव एवं चुनौतियों का समग्र विश्लेषण किया गया है, वहीं शिक्षित बेरोजगारी की समस्या के कारणों एवं संभावित समाधानों पर भी सारगर्भित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। उनकी यह लेखनी विद्यार्थियों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक, बल्कि प्रेरणादायक भी सिद्ध हो रही है।
उल्लेखनीय है कि डॉ. अग्रवाल अब तक 30 से अधिक पुस्तकों की रचना कर चुकी हैं। उनकी कृतियों में सीबीएसई बोर्ड की कक्षा 3 से 5 तक की अंग्रेज़ी एवं विज्ञान की पाठ्यपुस्तकें भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त ‘इवोल्यूशन ऑफ इंडियन एजुकेशन’, ‘समावेशी शिक्षा’, ‘शिक्षा का बदलता स्वरूप’, ‘कला शिक्षा’, योग शिक्षा, बाल शिक्षा में नवाचार तथा योग एवं आत्मबोध जैसे विविध विषयों पर आधारित उनकी पुस्तकें शिक्षा जगत में विशेष स्थान रखती हैं।
डॉ. निशा अग्रवाल द्वारा एक शोध ग्रंथ भी तैयार किया गया है, जिसे सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ गुजरात के सामाजिक विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. जनक सिंह मीणा के निर्देशन में विकसित किया गया। साथ ही उनकी एक अन्य महत्वपूर्ण कृति ‘सौहार्द शिरोमणि संत सौरभ पांडेय’ के जीवन, विचारों एवं समाजसेवा पर आधारित एक प्रेरक पुस्तक है, जो उनकी बहुआयामी लेखन क्षमता को दर्शाती है।
धौलपुर जिले के बाड़ी (पिपरेट) निवासी जगदीश प्रसाद मंगल की सुपुत्री डॉ. निशा अग्रवाल शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत प्रारंभ किए गए इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) पर भी उनकी चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जो शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान मानी जा रही हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. निशा अग्रवाल का योगदान अत्यंत अनुकरणीय एवं सराहनीय है। उनकी रचनाएँ न केवल विद्यार्थियों को ज्ञान प्रदान कर रही हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक सरोकारों के प्रति जागरूक करते हुए नई दिशा भी दे रही हैं।
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





हार्दिक आभार आदरणीय जी