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(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी 2026, मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी, भोपाल का आयोजन ☆ साभार – श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆

बाल साहित्य की बहुरंगी धारा: 20+ नई कृतियों का भव्य विमोचन

राष्ट्रीय बाल साहित्य संगोष्ठी 2026 का आयोजन मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी, भोपाल द्वारा एन.आई.टी.टी.टी.आर. (श्यामला हिल्स), भोपाल में 13-14 मार्च 2026 को दो दिवसीय भव्य रूप में संपन्न हुआ। यह संगोष्ठी भारत के प्रथम बाल साहित्य सृजन पीठ के निदेशक, ‘देवपुत्र’ बाल मासिक के पूर्व संपादक तथा बाल साहित्य के पुरोधा कीर्तिशेष श्रद्धेय कृष्ण कुमार अष्ठाना जी की स्मृति को समर्पित थी।

आदरणीय डॉ. विकास दवे (मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक) के आदेशानुसार और मार्गदर्शन में आयोजित इस संगोष्ठी में देशभर से बाल साहित्यकार, शोधार्थी, शिक्षक और बाल-साहित्य प्रेमी सम्मिलित हुए। संगोष्ठी के दौरान कुल 10 सत्रों में क्रमवार पुस्तक विमोचन का विशेष आयोजन किया गया, जिसमें 11 रचनाकारों की 20 से अधिक नई कृतियाँ बच्चों के समक्ष प्रस्तुत की गईं।

ये कृतियाँ बाल साहित्य की विविध विधाओं—कविता, कहानी, बालगीत, पत्र-लेखन, व्यंग्य, संस्कृति-आधारित गद्य—को समेटती हैं। ये पुस्तकें बच्चों के मनोरंजन, ज्ञानवर्धन, मूल्य-शिक्षा, राष्ट्रप्रेम, पर्यावरण चेतना तथा सांस्कृतिक जड़ों से गहरा जुड़ाव पैदा करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी। विमोचन समारोह ने बाल साहित्य की समृद्धि को नई ऊर्जा प्रदान की तथा रचनाकारों को पाठकों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बना।

विमोचित प्रमुख कृतियाँ का विवरण निम्न अनुसार है –

सर्वप्रथम डॉ. मीनाक्षी दुबे, भोपाल की पाती लेखन विद्या की पुस्तक— नौनिहालों के: पाती वीर सपूतों की, का विमोचन किया गया। इस पाती संग्रह की पुस्तक की प्रत्येक रचना बच्चों को संबोधित करते हुए काल्पनिक पत्र के रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे बच्चे महान विभूतियों जैसे भगत सिंह के साहस, रानी लक्ष्मीबाई की निर्भयता आदि को व्यक्तिगत रूप से निकट महसूस करें। पुस्तक में राष्ट्रप्रेम, साहस, सत्य, त्याग और अनुशासन के मूल्यों को हृदयंगम करने का उद्देश्य है, ताकि प्रत्येक बच्चा बेहतर नागरिक बनने की प्रेरणा प्राप्त करे।

दूसरे सत्र में किशोर श्रीवास्तव, ग्रेटर नोएडा, उ.प्र. की पुस्तकों का विमोचन किया गया। लेखक की अब तक लगभग 15 बाल पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। ये बाल कलाकारों पर लघु फिल्में बनाते हैं। इस सत्र में इनकी तीन पुस्तकें का विमोचन किया गया। पहली – विश्वास की रक्षा (चित्रमय 7 कहानियाँ, 48 पृष्ठ), घर, परिवार और रिश्तों की प्रेरक बाल कहानियाँ और दूसरी – मेहनत का फल (चित्रमय 4 कहानियाँ, 32 पृष्ठ)— पारिवारिक एवं सामाजिक प्रेरक कहानियाँ संकलित की गई हैं। सभी कहानियाँ पूर्व में लोटपोट, नंदन, बाल किलकारी, बच्चों का देश, दैनिक जागरण, दैनिक सन्मार्ग, बालवाणी आदि पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। एक तीसरी पुस्तक- खुशियों की वापसी, जिसमें चित्रमय 5 कहानियाँ, 32 पृष्ठ हैं जिसमें राजा-महाराजा युग की शिक्षाप्रद कहानियाँ सम्मिलित की गई है का विमोचन हुआ।

तीसरे सत्र में डॉ. भैरूँलाल गर्ग, भीलवाड़ा, राजस्थान; संपादक- बालवाटिका की पुस्तक — चलो चलें नानी के गाँव (बालकाव्य संग्रह) का विमोचन किया गया। यह बहुरंगी पुस्तक (40 पृष्ठ) में 20 कविताएँ हैं, जो बालक एवं किशोरों के परिवेश, ऋतु, पर्व, पर्यावरण, प्रकृति और मनोरंजन से जुड़ी हैं। चयन-संपादन एवं भूमिका डॉ. प्रकाश मनु जी की है, जो कविताओं की गुणवत्ता को और निखारती है।

चौथा विमोचन श्रीमती समीक्षा तैलंग, ग्वालियर/पुणे, की पुस्तक, जो व्यंग्य विधा पर आधारित है जिसका नाम — बेड़ा गर्क है, का विमोचन किया गया। इस व्यंग्य निबंध में समाज की विसंगतियों पर व्यंग्य व प्रहार किया गया है। वरिष्ठ समालोचक सुभाष चंदर जी के अनुसार, नये विषय, ट्रीटमेंट और शिल्प से यह पुस्तक अंदर तक झकझोर देगी।

अगले सत्र में पांचवा विमोचन शिवम सिंह, कानपुर देहात के गीतकार की बाल गीत पुस्तक — नन्हे मुन्ने गीत का विमोचन किया गया। यह उनकी पहली प्रकाशित कृति है जो 2023 में प्रकाशित हुई थीं। जिसका विमोचन अब हुआ। इसमें संगृहीत शिशुगीत की सहजता से सरल भावनाओं, जिज्ञासा और कल्पना को छूते हैं, जो छोटे बच्चों के लिए आदर्श है।

अगला विमोचन, सत्र के समापन में डॉ. सुधा गुप्ता ‘अमृता’, कटनी, म.प्र. की दो पुस्तकें का किया गया। इसमें उनकी पहली पुस्तक – बुंदेली संस्कृति के रंग, जिसकी विधा: गद्य है। यह मध्यप्रदेश की आंचलिक बोलियों में बाल गीत एवं खेल गीत, लोक संस्कृति से परिचय करती है। मध्य प्रदेश आदिवासी लोक भाषा विभाग, भोपाल द्वारा प्रकाशित की गई है। पुस्तक आंचलिकता से भरपूर है, जो साहित्य को समृद्ध करती है।  उनकी दूसरी पुस्तक जो कल विधा पर आधारित है- छई छपाक छपर छपर, जिसमें 22 बाल कविताएं संग्रहित है। जो बच्चों को छह ऋतुओं से रूबरू करवाती हैं ।

अगली पुस्तक सुषमा सिंह, दिल्ली की  पहली पुस्तक— नन्हा पाखी और दूसरी पुस्तक – कच्चा पापड़ हैं। इसमें छन्द मुक्त बाल कविताएँ सम्मिलित की गई है। ये कविताएँ बच्चों की कल्पना, भावनाओं और दैनिक जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को पंख लगा कर कल्पना को उड़ान देती हैं। यह सरल भाषा में गहन संदेश देती हैं। वही माधुरी व्यास “नवपमा”, इंदौर के कविता संग्रह— अनुभति, का विमोचन किया गया। इसमें 64 नई कविताओं का संकलन किया गया है। जिसमें आत्मानुभूति से उपजी प्रबल भावपक्ष की रचनाएँ सम्मिलित हैं। मानवीय संवेदना, वेदना, रिश्तों में प्रेम, यादें, प्रकृति, मौसम और पर्यावरण जैसे विषय सम्मिलित हैं, जो पाठक को गहराई से छूते हैं।

प्रसिद्ध बाल साहित्यकार डॉ. मंजरी शुक्ला के कहानी संग्रह — उड़ चले जादुई बर्तन, का विमोचन किया गया है। इसमें जादुई और मनोरंजक कहानी, जिसमें उड़ने वाले जादुई बर्तन, अन्न के सम्मान की शिक्षा देते हैं। भोजन बर्बादी रोकने और अन्न की महत्ता समझाने का संदेश—बच्चे पढ़ने के बाद अन्न के प्रति संवेदनशील बनाते हैं।

सुप्रसिद्ध साहित्यकार नीलम राकेश, लखनऊ, के बाल कहानी संग्रह की पुस्तक  – सतरंगी दुनिया, जिसमें नौ प्रेरक कहानियाँ, जो बच्चों के लिए चुनिंदा विषयों पर आधारित हैं, का विमोचन किया गया।  इनकी दूसरी पुस्तक – The Rainbow World — जिसका अंग्रेजी अनुवाद डॉ. राकेश चंद्रा द्वारा किया गया है, का विमोचन किया गया।

प्रोफेसर प्रभा पंत, हल्द्वानी, उत्तराखण्ड किसी परिचय की मोहताज नहीं है कि बाल साहित्य की 8 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं । उनकी तीन पुस्तकें , जिसमें पहली – मुझको सूरज बनना है, (कविता संग्रह) जिसमें प्रेरणा और ऊर्जा से भरपूर कविताएँ सम्मिलित हैं।  दूसरी पुस्तक – डिबिया में बंद चींटी (कहानी संग्रह) — जिसमें छोटी-छोटी घटनाओं से बड़े सबक सिखाती कहानियाँ संकलित है।  तीसरी पुस्तक – मेरी प्रिय बाल कहानियाँ— जिसमें उनकी चयनित प्रिय कहानियों का संग्रह है। का विमोचन किया गया।

डॉ अशोक व्यास जी के निबंध, जिसका नाम, “स्वप्न भंग का अनवरत सिलसिला”, का लोकार्पण किया गया। इसी के अंत में नीमच से प्रकाशित- राष्ट्र समर्पण, मासिक पत्रिका विमोचन किया गया जो पिछले 21 वर्षों से लगातार प्रकाशित हो रहा है। जिसके संपादक शारदा संजय शर्मा है।

यह विमोचन बाल साहित्य की बहुरंगी विविधता को दर्शाता है तथा बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। डॉ. विकास दवे जी के मार्गदर्शन में यह आयोजन बाल साहित्य के उत्थान का एक ऐतिहासिक पड़ाव सिद्ध हुआ।

सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं उनके भावी सृजन के लिए शुभकामनाएँ!

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साभार – श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”

25/03/2026

संपर्क – 14/198, नई आबादी, गार्डन के सामने, सामुदायिक भवन के पीछे, रतनगढ़, जिला- नीमच (मध्य प्रदेश) पिनकोड-458226

ईमेल  – opkshatriya@gmail.com मोबाइल – 9424079675 /8827985775

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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