☆ सूचनाएँ/Information ☆
(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)
☆ स्मृतिशेष जय प्रकाश पाण्डेय जी को व्यंग्य मित्र अलंकरण समर्पित ☆ साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार ☆
☆ रूप बदलते साँप व्यंग्य संग्रह का लोकार्पण संपन्न ☆
☆ व्यंग्यम का भावभीना कार्यक्रम ☆
श्रीजानकीरमण महाविद्यालय में स्व. जयप्रकाश पाण्डेय जी का स्मृति जन्मोत्सव एवं व्यंग्य संग्रह “रूप बदलते साँप” का लोकार्पण संपन्न हुआ जिसमें मुख्य अतिथि श्री राजीव कुमार शुक्ल, विशिष्ट अतिथि रूप में श्रीजानकीरमण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ अभिजात कृष्ण त्रिपाठी तथा मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य भगवत दुबे रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ कुंदनसिंह परिहार ने की।
स्व. जयप्रकाश पाण्डेय
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ वीणा वादिनी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से प्रारंभ हुआ। तदोपरांत स्व जयप्रकाश पाण्डेय जी के छाया चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। व्यंग्यम का परिचय एवं स्वागत उद्बोधन रमाकांत ताम्रकार द्वारा दिया गया। स्व पाण्डेय जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सुरेश मिश्र ‘विचित्र‘, अभिमन्यु जैन सहित स्वर्गीय श्री पांडेय जी की धर्मपत्नी श्रीमती मंजू पांडेय जी ने अपने आत्मीय उद्गार व्यक्त किए।
अतिथियों के करकमलों द्वारा स्व. श्री जयप्रकाश पाण्डेय जी के व्यंग्य संग्रह ‘रूप बदलते साँप‘ का भव्य लोकार्पण किया गया। इसी अवसर पर श्री दविंदर ग्रोवर ने व्यंग्य संग्रह ‘रूप बदलते सांप‘ में संकलित ‘अस्थि विसर्जन का लफड़ा ‘ व्यंग्य का पाठ किया गया। साथ ही आचार्य विजय तिवारी ‘किसलय‘ एवं यशोवर्धन पाठक ने पुस्तक पर चर्चा करते हुए विभिन्न प्रसंगों की विस्तृत व्याख्या की। हेमन्त बावनकर के श्री पांडेय जी पर केन्द्रित आलेख का वाचन किया। व्यंग्यम संस्था द्वारा श्री पांडेय जी के परिजनों को पाण्डेय जी को मरणोपरांत ‘व्यंग्य मित्र‘ अलंकरण प्रदान किया गया।
संपूर्ण कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रतुल श्रीवास्तव ने तथा आभार श्री विनोद खंडालकर द्वारा व्यक्त किया गया। आयोजन में राज सागरी, मनोज शुक्ल मनोज, आशुतोष तिवारी, डॉ गंगाधर त्रिपाठी, अजय मिश्रा, संजय जैन, अनिल अग्रवाल, नरेश जैन, मकबूल अली कादरी, ओ पी गुप्ता अशोक शुक्ल, गणेश प्यासा, सुभाष जैन शलभ, मनोज जैन मित्र, सुजय पांडेय, स्वयं पांडेय की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार, जबलपुर
≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈








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