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(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🌹– स्मृतिशेष वरिष्ठ पत्रकार मोहन शशि नहीं रहे – भावपूर्ण श्रद्धांजलि – ☆ साभार – श्री मनोज कुमार शुक्ल ‘मनोज’ –🌹

हमारे आदरणीय श्री मोहन शशि जी

हमारे मोहल्ले के श्याम कक्का, लीला कक्का, एवं मोहन कक्का यह ऐसे नाम थे, जो सभी के जुबान में रटे थे। हम सभी मित्रों की नगर के समाचार पत्रों की पाठशाला उनके घर पर हुआ करती थी। संपादक होने के कारण उनके घर जबलपुर के सभी अखबार आया करते थे और लेखन अभिरुचि बचपन से होने की वजह से मुझे पढ़ने का बड़ा शौक रहता था। श्री मोहन शशि अपने भाइयों में सबसे छोटे थे।

समाचार पत्र नवभारत में पत्रकार होने के नाते पूरे शहर में उनकी धाक थी। मिलन संस्था का एक बड़ा नाम था। मोहन शशि जी ने जबलपुर में नौटंकी, कव्वाली, बेलबाग की मुजरा पार्टी जैसे कार्यक्रमों की जगह शहर में सांस्कृतिक एवं साहित्य कार्यक्रमों से हवा का रुख बदला और बड़े-बड़े स्टेज बनाकर या गीत संगीत का वातावरण बनाया।

उन्हीं कार्यक्रमों से नगर में के के नायकर, यंग आर्केस्ट्रा के रजनीकांत, दत्तात्रेय-हेमंत कुलकर्णी बंधु, निरंजन शर्मा जैसे अनेक कलाकार उभर कर आए और पूरे देश में छा गए।

उनके बड़े भाई श्री श्यामलाल यादव बाद में पार्षद भी बने। मोहल्ले के लड़के बिगड़े न इसलिए आदर्श छात्र मंडल संस्था को बनाया। लालचबूतरा एक मंच बना। जिसमें वर्ष भर ढेर सारे कार्यक्रम होते रहते थे। जिसमें श्री लीलाधर यादव संयोजक बने। उस समय मिलन मित्रसंघ संस्था की धूम थी। सन् 1974-75 में श्री नाथ की तलैया में मिलन का एक भव्य कार्यक्रम होने वाला था। और उसी समय इलाहाबाद नाट्य संघ का कार्यक्रम भी तीन दिवसीय शहीद स्मारक में होने वाला था।

शशि जी इस कार्यक्रम में असुविधा महसूस कर रहे थे। तब उन्होंने हमारी संस्था को यह कार्यक्रम को करने का आफर दिया। हम लोगों ने कमर कसी मधुकर सरोज कोष्टा, शैलेश साहू, सुंदर लाल कोष्टा, महेश सिंह ठाकुर, मगन ठेकेदार सहित अनेक मित्र थे, मै (मनोज कुमार शुक्ल) सचिव था।

शहीद स्मारक में गेट के अगल-बगल दो खिड़कियां हुआ करतींः उसमें टिकट काउंटर के द्वारा अंदर प्रवेश मिलता था। अर्थात लोग टिकट खरीद कर ही कार्यक्रम को देखने जाते थे। इस तरह कार्यक्रम तीन दिनों तक चला जिसमें कई नाटक दिन में तीन नाटक संपन्न हुए। शशि जी समय निकालकर एक दो बार राउंड लगाते और खुश होते की आदर्श छात्र मंडल ने बखूबी अपने कर्तव्य का निर्वहन किया। शहर में जगह-जगह पोस्टर लगाए गए थे। पोस्टर बनाने में मधुकर सरोज कोष्टा सिद्ध हस्त थे। जिनकी आज देश में कई जगह चित्र प्रदर्शनी लग चुकीं हैं।

1978- 79 के दौरान हमारे एक कहानी संग्रह क्रांति समर्पण में श्री मोहन शशि ने भूमिका लिखी थी। इस कहानी संग्रह में पिता पुत्र की कहानियां थीं। श्री रामनाथ शुक्ल श्रीनाथ मेरे पिताजी थे। मिलन में मैं वर्षों कोषाध्यक्ष रहा। नौकरी की वजह से मैं इस शहर से उस शहर जाता रहा। जब गृह नगर आता तो उनसे अवश्य मिलता। तबसे लेकर आज तक उनका सानिध्य मुझे मिलता ही रहा है।

हमने नगर ही नहीं प्रदेश में सांस्कृतिक एवं साहित्यिक वातावरण की अलख जगाने वाले एक पुरोधा को खोया है। ईश्वर उन्हें अपने चरणों में जगह दे।

 साभार – श्री मनोज कुमार शुक्ल ‘मनोज’, जबलपुर 

🙏💐ई-अभिव्यक्ति परिवार की ओर से स्मृतिशेष मोहन शशि जी को विनम्र श्रद्धांजलि 💐🙏

≈संस्थापक संपादक श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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Vivek Ranjan
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दुखद समाचार 
विनम्र श्रद्धांजलि 

स्मरण है उनकी बेटियों पर किताब की 

जब मैं मंडला में था तब मेरे साथ उन्होंने तथा अम्बर प्रियदर्शी जी ने दूरदर्शन भोपाल से काव्य संध्या में हिस्सेदारी की थी । 
मिलन के आयोजनों में भी मंडला आए थे। 
PSM में भी कई गोष्ठियों में मंच पर उनका स्नेह मिला। 
सदैव स्नेह से मार्गदर्शन करते थे । 
विनत प्रणाम , परमात्मा उन्हें दिव्य स्थान दें। हिंदी साहित्यिक जगत हेतु उनका जाना बड़ी क्षति है।
विवेक रंजन श्रीवास्तव भोपाल