☆ सूचनाएँ/Information ☆
(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)
☆ पुणे में संपन्न सार्थक काव्यगोष्ठी ☆ साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे ☆
हाल ही में हिंदी के सुप्रतिष्ठित कवि संदीप मिश्रा ‘सरस‘ जी के पुणे आने की ख़ुशी में काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया था । हिंदी-सिन्धी-उर्दू कवयित्री इंदिरा पूनावाला जी ने इस गोष्ठी का आयोजन किया था। काव्यगोष्ठी के अध्यक्ष कवि संदीप मिश्रा ‘सरस‘ जी और प्रमुख अतिथि श्री. राजेंद्र श्रोत्रिय जी को पुष्प, श्रीफल, शाल देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर ज्येष्ठ कवि श्री. नंदकुमार मिश्र ‘आदित्य सामवेदी‘, श्री. गोविंद मिश्र, श्री. राजेंद्र श्रोत्रिय, डॉ. प्रेरणा उबाले, भावना गुप्ता, कुमार गौरव, वेद स्मृति मौजूद थे और उन्होंने अपनी कविताएँ काव्य गोष्ठी में प्रस्तुत की।
हास्य व्यंग्य कवि, नाटककार श्री राजेंद्र श्रोत्रिय, मध्य प्रदेश ने सरस्वती वंदना गाकर काव्य गोष्ठी का आरंभ किया तथा गाँव की स्मृतियाँ तजा करनेवाली ‘शहरों से आया है प्रभाव, कितना बदल गया है गाँव‘ कविता लय में प्रस्तुत कर सबको गाँव के वातावरण में ले गए। काव्य गोष्ठी की आयोजक इंदिरा पूनावाला ‘शबनम‘ ने ‘डरते-डरते एक-दूसरे के करीब आते हैं क्यों‘ शीर्षक गज़ल पढ़कर समां बाँध दिया।
पुणे की हिंदी- मराठी में लेखन करने वाली कवयित्री डॉ. प्रेरणा उबाले ने जीवन की शाश्वतता और क्षणभंगुरता को प्रतिपादित करने वाली ‘मिटता कुछ नहीं जिन्दगी से, मिलता सबकुछ जिन्दगी से‘ और ‘भूख थोड़ी बची रहें, पेट में आग थोड़ी बची रहें ‘ शीर्षक कविताएँ प्रस्तुत की। श्री. गोविन्द मिश्र, ने अपने गाँव और पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के कार्य की महती गानेवाला गीत प्रस्तुत किया। और वेद स्मृति ‘कृति‘, उत्तरप्रदेश ने कुंडलियाँ छंद में माता धवला दो मुझे वरदान‘ कविता का सरस पठन किया।
काव्य गोष्ठी के अध्यक्ष और प्रमुख अतिथि , साहित्य सृजन के संस्थापक श्री. संदीप मिश्र जी ने पुणे के अपने अनुभव सबसे साझा किए। पुणे की सभ्यता- संस्कृति की उन्होंने मुक्त कंठ प्रशंसा की। साथ ही पुणे के लोगों का हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति रुझान उन्हें अच्छा लगा और अपनी अनुभूतियों से निर्मित कविताओं का सस्वर पठन किया ‘मायके को संभाल देती हैं बिटिया, मन को खंगाल देती हैं बिटियाँ‘ कविता से उन्होंने सबको मोह लिया। ‘वेद मन्त्रों का पूर्ण फल अम्मा, गंगा के दिव्य जल अम्मा, जिन्दगी की कठिन परीक्षा में , सारे प्रश्नों का एक हल अम्मा‘ कविता ने सबकी वाहवाही बटोरी। साथ ही भावना गुप्ता ने ‘मैं कैसे कह दूं रुक जाना,’ और ‘शांत हूँ खुद में‘ कविताओं को प्रस्तुत किया।
सांस्कृतिक, सामाजिक दृष्टियों से साहित्य और भाषा को संरक्षण देने वाली तथा उनका संवर्धन करने वाली इस तरह की गोष्ठियों का आयोजन बहुत आवश्यक प्रतीत होता है। इंदिरा पूनावाला ‘शबनम‘ द्वारा आयोजित इस काव्य गोष्ठी में सभी ने कविताओं का आनंद लिया। विभिन विषयों पर पढ़ी गई कविताओं से हर्षोल्लास का वातावरण काव्य गोष्ठी में छाया रहा।
साभार – डॉ. प्रेरणा उबाळे
अध्यक्ष, हिंदी विभाग, मॉडर्न महाविद्यालय, शिवाजीनगर, पुणे
संपर्क- 7028525378
≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





