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डॉ कामना तिवारी श्रीवास्तव ‘कौस्तुभ’

(आज  प्रस्तुत है  डॉ कामना कौस्तुभ जी की एक विचारणीय लघुकथा अधूरे ख्वाब। 

 ☆ कथा कहानी ☆ लघुकथा – अधूरे ख्वाब ☆ डॉ कामना तिवारी श्रीवास्तव ‘कौस्तुभ’ ☆ 

सृजन माता-पिता का इकलौता बेटा था, दोनों का सपना था बेटा बड़ा होकर बहुत बड़ा गायक बने क्योंकि वह कभी नहीं बन पाये इसीलिए बेटे को सिंगर बनाने के लिए जी जान से जुट गए।

ढाई साल की उम्र से ही टीचर संगीत सिखाने घर आने लगे थे । सृजन को बस एक ही काम करना पड़ता था गाना गाना और सिर्फ गाना।सृजन का बचपन संगीत के सुर में उलझ कर रह गया।

धीरे-धीरे पूरा घर रिकॉर्ड्स वाद्य यंत्रों और सीडी प्लेयर्स से भर गया था।

आजकल अच्छे गायक बनने के लिए सबसे पह टीवी प्रोग्राम में आना जरूरी था इसलिए टीवी शो के लिए कड़ी जद्दोजहद, हफ्तों की प्रक्रिया और धूप गर्मी को झेलते हुए आखिरकार सृजन ऑडिशन राउंड में आ पहुचा, लेकिन तीसरे राउंड में पास नहीं हुआ ।

माता-पिता को हताश निराश और खुद की नाकामी पर सुंदर ने डिप्रेशन का सुर पकड़ लिया और नर्वस ब्रेकडाउन के साथ एक बचपन खत्म हो गया,,,,,,,,

© डॉ कामना तिवारी श्रीवास्तव ‘कौस्तुभ’

मो 9479774486

जबलपुर मध्य प्रदेश

 संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈

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