श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’

(ई-अभिव्यक्ति में श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ जी का स्वागत। पूर्व शिक्षिका – नेवी चिल्ड्रन स्कूल। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन। विधा –  गीत,कविता, लघु कथाएं, कहानी,  संस्मरण,  आलेख, संवाद, नाटक, निबंध आदि। भाषा ज्ञान – हिंदी,अंग्रेजी, संस्कृत। साहित्यिक सेवा हेतु। कई प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अलंकृत / सम्मानित। ई-पत्रिका/ साझा संकलन/विभिन्न अखबारों /पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। पुस्तक – (1)उमा की काव्यांजली (काव्य संग्रह) (2) उड़ान (लघुकथा संग्रह), आहुति (ई पत्रिका)। शहर समता अखबार प्रयागराज की महिला विचार मंच की मध्य प्रदेश अध्यक्ष। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – जीवन का रंग।)

☆ लघुकथा # ९५ – जीवन का रंग श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’

सुनो पूजा! तुम रोज-रोज खाना बनाकर क्यों बाहर को फेंक देती हो  और मैं तुम्हें दो-चार चीज बनाने को बोल देता हूं तो तुम्हारा मुंह बन जाता है?

कमल जी ने गुस्से से अपनी बहु रानी की ओर देखा।

पूजा ने कहा – मम्मी जी आप मुझे देख रही है सुबह से मैं काम में व्यस्त हूं बाहर  मैंने कब खाना फेंक दिया?

देखो बहू मैं क्यों झूठ बोलूंगी कल भी शाम को बाहर खाना पड़ा था और आज अभी यह देखना रोटी और यह सब्जी कितने अच्छे से उसके अंदर डाली हुई है रोल बनाकर?

मम्मी जी यह कौन कर रहा है?

मेरे पास इतनी फुरसत थोड़ी ना है कि मैं खाना बनाकर फेंकूंगी और आपको तो पता है कि मैंने आज आलू की सब्जी कहां बनाई?

ऐसी हरकतें कौन कर रहा है सामने वाली भाभी जी की यहां सीसीटीवी लगा हुआ है उसमें देख कर आती हूं। कौन है यह मेरे घर के सामने खाना फेंक कर घर में झगड़ा करवा रहा है?

बहु सामने वाली रागिनी भाभी जी के दरवाजे पर दस्तक देती है।  

भाभी जी दरवाजा खोलिए थोड़ा काम है।

क्या हुआ? आज लग रहा है खाना जल्दी बन गया आपका – मुस्कुराते हुए रागिनी ने पूछा।

नहीं आज मेरा खाना जल्दी नहीं बना है बल्कि घर में युद्ध हो गया है। रागिनी तुम अपने सीसीटीवी में देखकर बताओ कि मेरे घर के सामने रोज-रोज खाना कौन रख रहा है?

रागिनी और पूजा ने जब सीसीटीवी में देखा तो उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ कि उनके बगल वाली भाभी ही उनके घर के सामने रोज खाना रखकर, कुछ टोटका कर रही थी।

इसका वीडियो बना लेती हूं और मम्मी जी को दे देती हूं  मुझे बहुत परेशान करके रखा है।

पूजा ने वापिस घर आकर अपनी सास को बताया कि – मम्मी जी आप मेरे मोबाइल में यह वीडियो देख लीजिए अब आपको पता चल जाएगा कि खाना कौन बना बनाकर फेंक रहा है वरना आपके बेटे के आने के बाद आप मेरी ही शिकायत करती।

अरे बहु यह क्या कह रही है मैं अभी इसकी खबर लेती हूं।

फिर वे पड़ोसन झुमरी बहू से मिलकर बोली – आजकल के व्हाट्सएप पर मोबाइल ज्ञान को सुन सुनकर यह तुझे क्या हो गया कि बाबा के चक्कर में पड़कर तू यह सब काम क्यों कर रही है? इस सब में तू अपना समय और घर दोनों को बर्बाद कर देगी। प्रेम और श्रद्धा से भगवान की पूजा कर और मानवता के धर्म को समझ।

कमल जी की बातें सुनकर उनकी पड़ोसन झुमरी एकदम सन्न रह जाती है उसके चेहरे का रंग उड़ जाता हैं। वह रोने लगती है और कहती है मम्मी जी अब ऐसा कभी नहीं होगा। अब मैं सही राह पर चलूंगी।

कमला जी ने कहा ठीक है आज मैं तुम्हें माफ कर रही हूं। बेटा जीवन के रंग अजब-गजब होते हैं खुशी-गम धूप-छाँव की तरह आते जाते है। तुम्हारी कोई समस्या है तो मेरे पास आओ।

© श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’

जबलपुर, मध्य प्रदेश मो. 7000072079

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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