श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
(ई-अभिव्यक्ति में श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ जी का स्वागत। पूर्व शिक्षिका – नेवी चिल्ड्रन स्कूल। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन। विधा – गीत,कविता, लघु कथाएं, कहानी, संस्मरण, आलेख, संवाद, नाटक, निबंध आदि। भाषा ज्ञान – हिंदी,अंग्रेजी, संस्कृत। साहित्यिक सेवा हेतु। कई प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अलंकृत / सम्मानित। ई-पत्रिका/ साझा संकलन/विभिन्न अखबारों /पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। पुस्तक – (1)उमा की काव्यांजली (काव्य संग्रह) (2) उड़ान (लघुकथा संग्रह), आहुति (ई पत्रिका)। शहर समता अखबार प्रयागराज की महिला विचार मंच की मध्य प्रदेश अध्यक्ष। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय कहानी – ई-ग्रुप।)
☆ कथा कहानी # १०४ – ई-ग्रुप ☆ श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ ☆
“वाह! आग लेने आए थे और पैगंबर मिल गए।”
सभी दोस्तों को बैठे देख कर रवि ने बोला,” हम लोग यहाँ निमंत्रण देने आए थे पर लग रहा है कि अब दावत खाकर ही जाएंगे।”
“दावत तो शौक से खाइए पर जो निमंत्रण देने आए थे कहीं उसे अकेले ही हजम मत कर लेना।”
ज्योति की यह बात सुनकर सभी जोर से ठहाका लगाकर हँस पड़े।
विकास ने कहा -“नहीं ऐसी गलती कभी नहीं कर सकते पार्टियाँ तो अपनी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा है, खुशियाँ मनाने के लिए यानी वह दिन जो रोज – रोज आएंगे।
रवि ने कहा-“ऐसा हम चाहते हैं।”
“ओह! लगता है तुम्हारी शादी की सालगिरह है, मुबारक हो” रवि के दोस्तों ने कहा।”
” मुबारकबाद आज नहीं देना परसों हमारे घर आकर ही देना” ज्योति ने कहा” वैसे आप सभी के घर आकर निमंत्रण देने वाले थे, हम लेकिन सब लोग यहीं मिल गए इसीलिए एक साथ बोल दिया।”
“अरे, छोड़ो भी ज्योति इतनी तकलीफ और औपचारिकता की क्या जरूरत है ?”
“आप तो बस बताइए कब आना है हम लोग स्वयं पहुंच जाएंगे व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज डाल देती तब भी हम पहुंच जाते।”
विकास ने कहा-“परसों यानि शुक्रवार को 7:00 बजे यार पार्टी यदि शनिवार को रखें, तो ज्यादा अच्छा रहता रविवार को आराम से सोते।”
रवि ने कहा-“यार क्या कहें हमारी सालगिरह शुक्रवार को है उसी दिन आना तो अच्छा रहेगा क्योंकि 15वीं सालगिरह है और आप जैसे जिंदादिल लोग यदि आएँगे तो पार्टी में चार चांद लग जाएंगे।”
ज्योति ने कहा- ” फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग वाले को भी बुलाया है समाचार पत्रों में भी भेजना है इसलिए देर मत करना अच्छे से तैयार होकर समय पर आना।”
सभी दोस्तों में से अचानक विकास ने कहा-” जिंदादिल तो हम सभी हैं पर यह नुमाइश करने की क्या जरूरत है वह जोर से हॅंसने लगा।”
रवि ने कहा-“क्या मतलब है?”
विकास ने कहा-“शादी की सालगिरह हल्ले गुल्ले के साथ मनाना मेरे ख्याल से तो यार नुमाइश करना ही है दोस्तों को बुलाने की किसी बहाने की जरूरत नहीं होती।”
रवि ने कहा-“पार्टी एक दूसरे के साथ मनानी चाहिए पर फेसबुक और समाचार पत्रों के माध्यम से ही तो असली आनंद आता है वरना रोज तो हम एक दूसरे के साथ कहां रहते हैं।”
“तुम नौकरी वाले हम बिजनेसमैन की बात नहीं समझोगे इसी बहाने हमें बिजनेस और नए-नए रिलेशन भी मिलते हैं।”
“यह खुफिया बात है । वह जोर से हॅंसा।”
सभी दोस्तों ने कहा-” तो मियां बीवी मिलकर हमें परेशान करने का सोच रहे हो।”
विषय बदलें और वातावरण से तनाव हटे इसके लिए ज्योति ने कहा।
विकास की पत्नी ने कहा- “चलो हम सभी लोग खाना खा लेते हैं।”
“कहाँ हो विकास भाई, ठहाके के इस गुलजार माहौल में किसी की तुलना नहीं करनी चाहिए।”
विकास की पत्नी (रजनी) ने कहा- “भाई साहब यह सब बातें छोड़िए आज तो आपकी पार्टी हो रही है ना, आप मजे लीजिए?”
रवि ने कहा-“कुछ लोग जैसे विकास बहुत बड़ा कंजूस हैं अकेले पार्टी मनाने को ही खुशी कहते हैं ।”
ज्योति ने कहा- “खुशी जब तक व्हाट्सएप और फेसबुक में फोटो न डालो तो कैसे आनंद प्राप्त होता है।”
सभी लोग ज्योति और रवि के घर शुक्रवार के दिन गए उन्हें शादी की सालगिरह की बधाई दे रहे थे दोनों बहुत अच्छे लग रहे थे रवि डॉ शंकर का बेटा था डॉक्टर साहब अब बहुत बुजुर्ग और कमजोर हो गए थे ।
दोस्तों ने पूछा- “तुम्हारे पिताजी नजर नहीं आ रहे हैं उन्हें क्यों नहीं बुलाया? क्या वह कहीं बाहर गए हैं?”
रवि ने कहा-“हम यंगस्टर की पार्टी में पिताजी आकर क्या करेंगे? शायद इसीलिए वे अपने अस्पताल में गए होंगे, आजकल ज्यादातर वे वहीं रहते हैं।”
तभी अचानक उनके घर के ऊपर की मंजिल से जोर से आवाज आई ।
ऐसा लगा कि कोई गिर पड़ा है।
विकास ने कहा- “यार लगता है ऊपर कुछ गिरा है।”
रवि ने कहा- “यार तू पार्टी के मजे ले नहीं तो ऊपर जा आराम कर हमें परेशान मत कर?”
विकास जब कमरे में गया तो उसने देखा – “डॉक्टर शंकर गिर पड़े थे उनके सिर से खून निकल रहा था।”
वह तुरंत उन्हें लेकर अस्पताल गया उनके सिर पर गहरी चोट लग गई थी और उनका बीपी बहुत लो हो गया था वह अस्पताल से रवि को और ज्योति को फोन कर रहा था लेकिन किसी ने उसका फोन नहीं सुना और सब फोटो खींचा रहे थे रात के 10:00 बजे रवि ने विकास को फोन करके कहा कि यार तुम कहाँ चले गए थे? कितनी सुंदर सुंदर फोटो पेपर के फ्रंट पेज में मैं कल की न्यूज़ के लिए दे दिया हूं लेकिन तुम क्यों नहीं आए और तुम्हारा एक भी फोटो नहीं है।
विकास ने कहा- ” मैं शंकर अंकल के साथ अस्पताल में हूँ अंकल की हालत बहुत गंभीर है।” तुम्हें बहुत फोन किया लेकिन तुमने फोन नहीं उठाया किसी क्षण कुछ भी हो सकता है बचपन में जब हम तुम छोटे थे तो अंकल ने मेरी बहुत मदद की इसलिए ऊपर जब आवाज आई तो मैं अपने आप को नहीं रोक पाया लेकिन तुम अब बहुत बड़े आदमी बन गए हो? इसलिए हम जैसे छोटे लोगों की अब तुम्हें परवाह नहीं रह गई है।
रवि ने कहा-“छोड़ो विकास मुझे नीचा मत दिखाओ तुमने कोई महान कार्य नहीं किया है आखिर मेरे पिताजी डॉक्टर थे और तुम उन्हीं के अस्पताल में उन्हें भर्ती कराने के लिए लेकर गए और मेरे ऊपर इल्जाम लगा रहे हो।”
“ठीक है मैं आता हूँ।”
ज्योति और विकास अस्पताल पहुंचते हैं और साथ ही साथ मीडिया और प्रेस वाले को भी बुलाते हैं ।
दोनों रोनी सूरत बनाने का नाटक करते हैं और कहते हैं।
“मेरे पिताजी बहुत बीमार हैं।”
रवि ने पत्रकारों से कहा- इस तरह की अच्छी सी न्यूज़ अखबार में फ्रंट पेज पर फोटो के साथ छापना चाहिए।
विकास दूर से यह सब कुछ देखते हुए मुस्कुराता रहता है ।
एक लंबी सांस लेते हुए गहरी चिंता में खो जाता है। उसके मस्तिष्क में अचानक विचार आता है कि क्या यही जो मैं देख रहा हूँ सच है क्या एक पुत्र भी इतना स्वार्थी होता है?
वाह-वाह ई- ग्रुप और इसकी महिमा।
अब लोग पिताजी की भी फोटो को अपने सोशल प्लेटफॉर्म में डालकर हमदर्दी लेते हैं और महान बनने का स्वांग रचते हैं।
सही परिभाषा सेवा करने की बस फोटो और स्टेटस में ही है, घर से भी ज्यादा महत्वपूर्ण ये ई ग्रुप है।
© श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
जबलपुर, मध्य प्रदेश मो. 7000072079
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






