श्री प्रहलाद नारायण माथुर

( श्री प्रह्लाद नारायण माथुर जी  अजमेर राजस्थान के निवासी हैं तथा ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी से उप प्रबंधक पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। आपकी दो पुस्तकें  सफर रिश्तों का तथा  मृग तृष्णा  काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुकी हैं तथा दो पुस्तकें शीघ्र प्रकाश्य । आज से प्रस्तुत है आपका साप्ताहिक स्तम्भ – मृग तृष्णा  जिसे आप प्रति बुधवार आत्मसात कर सकेंगे। इस कड़ी में आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता मेरे शब्द।) 

 

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☆ साप्ताहिक स्तम्भ – मृग तृष्णा # 10 –  मेरे शब्द 

 

आज जिन्दा हूँ तो कोई याद करता नहीं,

कल मेरी तस्वीर टंगी देखकर लोग रोने लगेंगे ||

 

माहौल बहुत गमगीन हो जाएगा,

जब मेरे बचपन की यादों में लोग मुझे ढूँढने लगेंगे ||

 

कल जब लोग मुझे अपने बीच नहीं पाएंगे,

यकीन कीजिए मेरे शब्द उनकी आंखे नम कर देंगे ||

 

जब चला जाऊँगा  लौट कर फिर ना आऊँगा,

मेरी कविताओं में लोग मुझे नम आँखों से ढूँढने लगेंगे ||

 

जो लोग मुझे कभी कोसते नहीं थकते,

मेरी कविताओं में मेरा किरदार  ढूँढने लगेंगे ||

 

मैं कल जब निःशब्द हो जाऊँगा  ,

लोग मेरी किताब के पन्ने पलट कर मुझे ढूँढने लगेंगे ||

 

जब निशब्द हो जाऊँ  परेशान ना होना,

मुझे किताबों में देख लेना, मैं हर शब्द में मिल जाऊँगा  ||

 

ढूँढतेरहोगे मुझे यादों के झरोखों में,

किताब के किसी मुड़े हुए पन्ने में तुम्हें मिल जाऊँगा ||

 

©  प्रह्लाद नारायण माथुर 

8949706002
≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈

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