श्री मनजीत सिंह

(प्रख्यात कवि, नाटककर, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता श्री मंजीत सिंह जी, ख़ान मंजीत भावड़िया “मजीद”’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। वर्तमान में वे पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला से भाषा विज्ञान में पी एच डी कर रहे हैं और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं और उर्दू भाषा के संरक्षण व प्रचार प्रसार के प्रति समर्पित हैं। उनकी प्रमुख साहित्यिक कृतियों में “हरियाणवी झलक” (काव्य संग्रह) और “बिराणमाट्टी” (नाटक), रम्ज़ ए उर्दू, हकीकत, सच चुभै सै शामिल हैं, जो हरियाणा की संस्कृति और सामाजिक जीवन की झलक प्रस्तुत करती हैं। उनके साहित्यिक कार्यों को हरियाणा साहित्य अकादमी, हरियाणा उर्दू अकादमी, वैदिक प्रकाशन और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा सम्मानित किया गया है। साहित्य और शिक्षा के साथ-साथ, ख़ान मनजीत अपने पारिवारिक परंपरा से जुड़े हुए एक कुशल कुम्हार (पॉटर) भी हैं।)

आज प्रस्तुत है श्री विनोद सिल्ला जी द्वारा संपादित पुस्तक “लघु कविता व्योमपर चर्चा।

“लघु कविता व्योम” – सम्पादक – श्री विनोद सिल्ला ☆ चर्चा – श्री मनजीत सिंह

पुस्तक चर्चा

किताब – लघु कविता व्योम

सम्पादक – विनोद सिल्ला

कीमत-300 रूपये

प्रकाशन – विपिन पब्लिकेशन ,रोहतक

पृष्ठ -120

समीक्षक -मनजीत सिंह

 

108 कवि-कवयित्री को मिला लघु कविता सम्मान – श्री मनजीत सिंह 

लघु कविता व्योम जोकि एक ज्ञानवर्धक कविताओं का संग्रह है जिसको सम्पादित किया है विनोद सिल्ला व सहयोगी मीना सिल्ला जी ने इस कविता संग्रह की खूबसूरती यह है कि इसमें 108 कवि-कवयित्री‌ शामिल हैं। जोएक तरह से अध्यात्म से जुड़ा हुआ है।  हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और योग में, इस्लाम में 108 संख्या का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। यह आध्यात्मिक पूर्णता, ब्रह्मांड और दिव्य चेतनाका प्रतीक है, जो ब्रह्मांडीय मापों (सूर्य/पृथ्वी की दूरी), पवित्र ग्रंथों (108 उपनिषद) और प्रथाओं (माला में 108 मनके, देवताओं के 108 नाम) में दिखाई देती है। यह समग्रता का प्रतीक है, जिसकी विभिन्न सांस्कृतिक व्याख्याएं हैं, जैसे हृदय चक्र पर अभिसरित होने वाली 108 ऊर्जा रेखाएं या बौद्ध धर्म में 108 दोष, जो आध्यात्मिक सद्भाव के मार्ग का प्रतीक हैं।  वहीं जो व्योम शब्द सम्मिलित किया है उसका अर्थ है व्योम (Vyom) नाम का अर्थ मुख्य रूप से आकाश, अंतरिक्ष, या आसमान होता है, जो विशालता, स्वतंत्रता, और अनंत संभावनाओं का प्रतीक है, और यह संस्कृत मूल का एक लोकप्रिय नाम है जो लड़कों के लिए इस्तेमाल होता है। इसके अन्य अर्थों में मेघ (बादल), जल, और हवा भी शामिल हैं।

सिरसा से आए हुए वरिष्ठ कवि डा रूप देवगुण न कहा कि – जब कभी मैं कविता संग्रह पढ़ता था तो उसमें बड़ी कविताओं के साथ छोटी कविताएं भी होती थी। इन दोनों को ही कविता कहा जाता था। मुझे दुख इस बात का होता था कि छोटी कविताओं को कोई पूछता नहीं था। वे घुटनमय जीवन व्यतीत कर रही थी। इस दुखमय जीवन से उन्हें छुटकारा दिलवाने के लिए मैंने लघुकविताओं के संग्रह प्रकाशित करवाने आरम्भ किए, अब तक मेरे 20 लघुकविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। आरम्भ में लघुकविता के तत्व निर्धारित नहीं हुए थे। तब कोई 5 पंक्तियों की तो कोई 12 पंक्तियों की लघुकविता लिख रहा था। सन् 2019 में मैंने हरियाणा की प्रतिनिधि लघुकविता का प्रकाशन किया। जिसके तीन लघुअध्यायों में मैंने ‘लघुकविता की आवश्यकता, ‘लघुकविता का स्वरूप’ तथा ‘लघुकविता के तत्व’ पर अपने विचार व्यक्त किये। लघुकविता के तत्व निर्धारित किये 6 से 10 पंक्तियां (बाद में केवल 10 पंक्तियां), मुक्त छंद, भावनाओं का प्राधान्य, कल्पना का प्राचुर्य, सकारात्मक विचार तथा अन्य तत्व कविता जैसे। इन तत्वों को मैंने साहित्यकारों तक पहुंचाया और अब तक 100 से अधिक साहित्यकारों ने 250 लघुकविता संग्रहों से हिन्दी साहित्य को समृद्ध किया है।

प्रारम्भ में डॉ. प्रद्युम्न भल्ला, विनोद सिल्ला आनंद प्रकाश आर्टिस्ट, जनक राज शर्मा, ने अपने-अपने शहरों में लघुकविता सम्मेलन करवा कर, इस विधा को आगे बढ़ाया। इन्होंने लघुकविताकारों को सम्मानित किया तथा विमोचन भी करवाये। आनंद प्रकाश आर्टिस्ट ने अपने प्रकाशन से 100 से अधिक लघुकविता संग्रह प्रकाशित किये तथा अपने संपादन में ‘आनंद मार्ग’ पत्रिका के लघुकविता विशेषांक निकाले। डॉ. रामकुमार घोटड़ ने भी अपने संपादन में सारा पत्रिका का लघुकविता विशेषांक निकाला। डॉ. शील कौशिक ने लघुकविता में प्रकृति आलोचनात्मक दृष्टि समालोचनात्मक पुस्तक में केवल प्रकृति से संबंधित 51 लघुकविता संग्रहों की समीक्षा करके शोधपरक संग्रह प्रकाशित किया। डॉ. मधुकांत व पवन मित्तल ने लघुकविता प्रतियोगिता करवाई। इस बार 18 मई 2025 को सिरसा में तीसरा अखिल भारतीय लघुकविता सम्मेलन भी करवाया। जिसमें 51 लघुकविता संग्रहों का विमोचन हुआ तथा 51 लघुकविताकारों को सम्मानित किया गया।

सम्पादक महोदय विनोद सिल्ला ने बताय कि ‘लघुकविता व्योम’ संकलन आपको सौंपते हुए अतीव प्रसन्नता हो रही है। जब मैंने ‘लघुकविता व्योम’ के संपादन का कार्य अपने हाथ में लिया तो मुझे लगा कि यह काम अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन उतना ही मुश्किल भी। लघुकविता के पुरोधा प्रोफेसर रूप देवगुण ने जब मेरा होंसला बढ़ाया तो मुझे लगा कि यह कार्य भले ही मुश्किल हो लेकिन असंभव नहीं है। उसके बाद लोग जुड़ते गए, कारवां बनता गया। एक-एक करके 108 रचनाकार इस संकलन में शामिल हो गए। वो भी पूरे उत्साह के साथ। इन रचनाकारों में 48 महिला लघुकविताकार शामिल हैं। जिन्होंने नारी विमर्श पर बेबाकी से कलम चलाई है। इनके अतिरिक्त 60 पुरुष लघुकविताकारों ने भी सामाजिक सरोकारों पर लेखन करके प्रगतिशील सृजन किया है। इस संकलन में 79 लघुकविताकार हरियाणा, 12 राजस्थान, 8 दिल्ली, 5 पंजाब और एक-एक रचनाकार क्रमशः उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़, गुजरात व मध्य प्रदेश से शामिल हैं। जबकि हरियाणा के फतेहाबाद, सिरसा, हिसार, सोनीपत, जीन्द, रोहतक, झज्जर, गुरुग्राम, फरिदाबाद, चरखी दादरी, भिवानी, नारनौल, रेवाड़ी, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, पंचकूला सहित 17 जिलों के लघुकविताकारों ने सहभागिता की। यहीं नहीं संकलन के प्रकाशन में जाने के बाद भी अनेक रचनाकारों की लघुकविताएं प्राप्त हुई। जिन्हें अगले संकलन में शामिल करने का प्रयास करूंगा।

इस संकलन में जहां डॉ. मधुकांत, डॉ. रूप देवगुण, डॉ. अशोक कुमार मंगलेश, डॉ. प्रद्युम्न भल्ला, डॉ. शील कौशिक, डॉ. तेजिंदर, जैसे वरिष्ठ रचनाकार हैं। वहीं अनेक नवोदित रचनाकार भी सम्मिलित हैं। इस संकलन के संपादन का एकमात्र उद्देश्य हिन्दी भाषा, हिन्दी साहित्य की सेवा करना और हिन्दी साहित्य की नई-नवेली विधा लघुकविता को स्थापित करने में अपना योगदान देना है। अनेक रचनाकार अपने-अपने ढंग लघुकविता के आंदोलन में अपना योगदान दे रहे हैं। कोई समीक्षा करके, कोई सृजन करके, कोई प्रकाशन करके तो कोई सृजनरत प्रतिभाओं को सम्मानित करके। मैंने संपादन का रास्ता चुना।

इस कविता संग्रह में निम्नलिखित कवियों ने हिस्सा लिया

अनिल खर्ब,डॉ. गौरी अरोड़ा,अनिल शर्मा वत्स,गीतकार गुरप्रीत,अनील शूर ‘आजाद’,डॉ. घमंडी लाल अग्रवाल,अंजु कपूर गांधी,डा चन्द्रभान चन्द्र,अंजु दुआ जैमिनी,डॉ. चन्द्रदत्त शर्मा,अर्चना कोचर, चंद्रवती दिक्षित, डॉ. अशोक कुमार, छत्र छाजेड़,अशोक मलंग, जय भगवान यादव

आनन्द कुमार आशोधिया,जय भगवान सिंगला,डॉ. आरती बंसल, जयसिंह ‘जीत’, आशमा कौल,ज्ञान प्रकाश पीयूष

आशा खत्री ‘लता’,डाली हरमन,आशा विजय विभोर, पवन गहलोत, आशा सिंगला, पवन मित्तल,आशीष कुमार मीणा

 डॉ. प्रद्युम्न भल्ला,डॉ. इन्दु शुप्ता,प्रेम कुमार शर्मा,ऋचा वैद,प्रवीण पारीक ‘अंशु’,ओमप्रकाश लांग्यान,प्रीत भरपूर, कश्मीर मौजी,डॉ. पुष्पा कुमारी, कांशी राम,पूजा आबाद

कुमार शर्मा अनिल,बलबीर सिंह वर्मा ‘वागीश’,डॉ. कैलाश कौशल,बलविन्द्र सिंह सरपंच, कौशल समीर (सोनू),बलवंत सिंह मान, कृष्णलता यादव,बिंदु शर्मा ‘नेहा’

खुशबू जैन हांसी, डॉ. बी. एल. सैनी,गरिमा राकेश ‘गर्विता’

 बृज बाला गुप्ता,बसन्ती पंवार,भूप सिंह भारती,मदन लाल राज,मधुलिका सिन्हा,डॉ. मधुकांत,मनजीत शर्मा ‘मीरा’,मीना रानी,मीनाक्षी पारीक,मुकेश दुहन ‘मुकू,मुकेश पासवान,मुनीष शाद,मुरारी लाल अरोड़ा ‘आजाद’

डॉ. तेजिंद्र,डॉ. तृप्ति गोस्वामी,दर्शना जांगड़ा, दलबीर फूल’,दिलबाग अकेला,डॉ. धर्मपाल साहिल,डॉ. नीना छिब्बर,नीलम व्यास स्वयंसिद्धा,डॉ. नीरू पारीक ‘नीर’, डॉ. नीरू मित्तल नीर,नीरू मेहता,एडवोकेट नीलम नारंग,डॉ. रमाकांता,राजेंद्र कुमार शर्मा,डॉ. रामअवतार कौशिक

राकेश कुमार जैनबन्धु, रीतू रुत,डॉ. रूप देवगुण,रेणु सिंह राधे्ल,ललिता विम्मी्लाडो कटारिया,डॉ. विकास आनंद, विजय भारद्वाज,विनोद सिल्ला,सचिन सुरबरा,सत्यप्रकाश भारद्वाज,संतोष अग्रवाल सागर,सरदानंद राजली,सरोज दहिया,सरोज कुमार श्वेता,सावित्री धारीवाल,सीमा शर्मा

सीमा जोशी मूथा,सुकीर्ति भटनागर, सुदेश कुमारी, सुरेन्द्र कल्याण,सुरेश कुमार ‘कल्याण’, सुरेश पंचारिया, सूबे सिंह सुबोध, बरवाला,डा. मेजर शक्तिराज, डॉ. शील कौशिक

प्रो. श्यामलाल कौशल,हरीश झंडई,हरीश सेठी ‘झिलमिल’ आदि ने कविता को बहुत सुंदर शब्दों में पिरोया है। सभी की कविता देना सम्भव नहीं है। इसलिए नाम देने की कोशिश की है बहुत खूबसूरत किताब के लिए विपिन पब्लिकेशन,रोहतक का आभार व लघु कविता सम्मान समारोह में सम्मानित हुए आप सभी को हार्दिक बधाई।

चर्चाकार… श्री मनजीत सिंह

सहायक प्राध्यापक (उर्दू), कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र 

manjeetbhawaria@gmail.com 

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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