डॉ. ऋचा शर्मा
(डॉ. ऋचा शर्मा जी को लघुकथा रचना की विधा विरासत में अवश्य मिली है किन्तु ,उन्होंने इस विधा को पल्लवित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी । उनकी लघुकथाएं और उनके पात्र हमारे आस पास से ही लिए गए होते हैं , जिन्हें वे वास्तविकता के धरातल पर उतार देने की क्षमता रखती हैं। आप ई-अभिव्यक्ति में प्रत्येक गुरुवार को उनकी उत्कृष्ट रचनाएँ पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है स्त्री विमर्श पर आधारित एक ऐतिहासिक लघुकथा — वीरांगना ऊदा देवी। डॉ ऋचा शर्मा जी की लेखनी को सादर नमन।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – संवाद # 151 ☆
☆ ऐतिहासिक लघुकथा — वीरांगना ऊदा देवी ☆ डॉ. ऋचा शर्मा ☆
16 नवंबर 1857 की बात है अंग्रेजों को पता चला कि लगभग दो हजार विद्रोही भारतीय सैनिक लखनऊ के सिकंदरबाग में ठहरे हुए हैं। अंग्रेज चिनहट की हार से बौखलाए हुए थे और भारतीयों से बदला लेने की फिराक में थे। अंग्रेज अधिकारी कोलिन कैम्पबेल के नेतृत्व में सैनिकों ने सिकंदरबाग़ को घेर लिया। देश के लिए मर मिटनेवाले भारतीय सैनिक आने वाले संकट से अनजान थे।
अवध के छठे बादशाह वाजिदअली शाह ने महल में रानियों की सुरक्षा के लिए स्त्रियों की एक सेना बनाई थी। ऊदा देवी इस सेना की सदस्य थीं, अपने साहस और बुद्धिबल से जल्दी ही नवाब की बेगम हज़रतमहल की महिला सेना की प्रमुख बना दी गईं। साहसी ऊदा जुझारू स्वभाव की थीं, डरना तो उसने जाना ही नहीं था और निर्णय लेने में तो वह एक पल भी ना गंवाती थीं। सिकंदरबाग में अंग्रेज सैनिक भारतीय सैनिकों के लिए काल बनकर आ रहे थे, वीरांगना ऊदा देवी हमले के वक्त वहीं थीं। देश के लिए जान न्यौछावर करनेवाले इन वीर जवानों को वे अपनी आँखों के सामने मरते नहीं देख सकती थीं। उसने पुरुषों के कपडे पहने, हाथ में बंदूक ली और गोला-बारूद लेकर वह पीपल के पेड़ पर चढ़ गईं। पेड़ पर से लगातार गोलियों से हमलाकर उसने अंग्रेज़ सैनिकों को सिकंदरबाग़ में प्रवेश नहीं करने दिया, दरवाजे पर ही रोके रखा। ऊदा देवी ने अकेले ही ब्रिटिश सेना के दो बड़े अधिकारियों और 36 अंग्रेज़ सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था। यह देखकर अंग्रेजी अधिकारी बौखला गए वे समझ ही नहीं सके कि कौन और कहाँ से उनके सैनिकों को मार रहा है। तभी एक अंग्रेज सैनिक की निगाह पीपल के पेड़ पर गई। उसने देखा कि पेड़ की डाली पर छिपा बैठा कोई लगातार गोलियां बरसा रहा है। बस फिर क्या था, अंग्रेज़ सैनिकों ने निशाना साधकर उस पर गोलियों की बौछार कर दी। एक गोली ऊदा देवी को लगी और वह पेड़ से नीचे गिर पड़ीं।
अँग्रेज़ अधिकारियों को बाद में पता चला कि सैनिक के वेश में वह भारतीय सैनिक कोई और नहीं बल्कि वीरांगना ऊदा देवी थी।
© डॉ. ऋचा शर्मा
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बहुत सुंदर शौर्य गाथा। ऐसी कथाएँ अवश्य सामने आनी चाहिए। ऋचा जी को बधाई।