श्री राकेश कुमार

(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ  की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” ज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)

☆ आलेख # 140 ☆ देश-परदेश – 🧁 विश्व आइसक्रीम दिवस: तीसरा रविवार, जुलाई 🍦 ☆ श्री राकेश कुमार ☆

गूगल ने आज ये जानकारी प्रदान करी, कि आज “आइसक्रीम दिवस” है। मन को बड़ी ठंडक मिली, गर्मी से बहुत बुरा हाल हो रहा हैं। तभी मन के भीतर से आवाज़ आई, कि हमारा तो गला बहुत खराब है। आइसक्रीम ग्रहण करने से स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता हैं। इसलिए मन की,ये ठंडक तो मात्र कुछ क्षण की थी।

बचपन में हमारे घर पर जब फ्रिज नहीं था,हाथ की मशीन से आइसक्रीम बनती थी। बर्फ और नमक के उपयोग से दूध को इतना ठंडा किया जाता था,और बहुत अधिक मेहनत के बाद ही वो आइस क्रीम का आकार ले पाता था। मेहनत का फल मीठा होता है,शायद आइस क्रीम बनाने की क्रिया से ही बना होगा।

परिचित अमीरों के विवाह में आइस क्रीम भी सीमित मात्रा में खाने को मिलती थी। एक छोटा सा क्वालिटी ब्रांड का कप प्रचलन में हुआ करता था। समय के अनुसार ईंट (ब्रिक्स ) आकर की आइसक्रीम विवाह आदि कार्यक्रमों में भी खूब खाई थी।

युवावस्था में परिवार के विवाह कार्यक्रमों में आइसक्रीम के स्टॉल पर ड्यूटी लगती थी। एक बार विवाह में ब्रिक्स को काटकर हम आइसक्रीम का वितरण कर रहे थे। एक परिचित को जब हमने ब्रिक्स को काट कर उनको दिया, तो वो बोले मैं बाद में ले लूंगा। अंतिम टुकड़े को जब काट रहे थे, तो वो परिचित बोले, अब और कितने टुकड़े करोगे, इस प्रकार से उन्होंने दो व्यक्तियों के बराबर की आइसक्रीम डकार ली थी।

विवाह आदि में आज भी मीठे के स्टॉल भर सबसे अधिक भीड़ मिल जाती हैं। घर में जिन व्यक्तियों को शुगर की बीमारी के कारण मीठा प्रतिबंधित रहता है, ऐसे व्यक्ति मौक़े पर चौके लगा लेते हैं।

बाजार में तो शुगर रोगियों के लिए “शुगर फ्री” आइसक्रीम भी उपलब्ध हो गई है, आने वाले समय में खांसी/गले के रोगियों के लिए भी शायद” खांसी फ्री ” आइसक्रीम आ सकती हैं। हमें तो तब तक इंतजार ही करना पड़ेगा।

© श्री राकेश कुमार

संपर्क – B 508 शिवज्ञान एनक्लेव, निर्माण नगर AB ब्लॉक, जयपुर-302 019 (राजस्थान)

मोबाईल 9920832096

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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