श्री राकेश कुमार

(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ  की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” ज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)

☆ आलेख # १४४ ☆ देश-परदेश – ऑनलाइन गेमिंग पर प्रतिबन्ध : एक चर्चा ☆ श्री राकेश कुमार ☆

“हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है” विज्ञान कहता हैं। हमारे देश में ऑनलाइन गेमिंग पर रोक लगा दी गई हैं। जब से समाचार आया है, हमारे कुछ क्रिकेट के खिलाड़ी, टीवी आर्टिस्ट, फिल्मी हीरो इस के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय जाने की सोच रहें हैं। उनकी तो रोज़ी रोटी की बात बन आई हैं। कपिल सिब्बल जैसे नामी वकील बिना फीस के उनका केस लड़ने की तैयार हैं। उनको सिर्फ ऑनलाइन गेम्स के मुफ्त वाले पॉइंट्स मिलने चाहिए, ताकि वो भी इस प्रकार के खेलों में भाग ले सकें।

खाद्यदूत स्विगी, जोमैटो आदि के कार्यों में लगे हुए लोगों का काम भी बहुत कम हो जाएगा। ऑनलाइन खेलने वाले गेम में इतने व्यस्त रहते है, कि बेचारे खाना बना ही नहीं पाते हैं। अब ऐसे लोग खुद ही खाना बना कर खा लेंगे। देश की आर्थिक प्रगति तक रुक जाएगी।

टीवी चैनल्स के ऑनलाइन विज्ञापन कम हो जाने से चैनल वालों की आय में गिरावट आना तय हैं। इसकी पूर्ति वो दर्शकों से लिए जाने वाले शुल्क में वृद्धि कर सकते हैं। मोबाइल की बिक्री में बहुत बड़ी गिरावट से इनकार नहीं किया जा सकता हैं।

हमारे एक मित्र ने एक मकान में एयर बी एन बी ( किराए पर कमरा सुविधा) बनाई थी। पूर्व में कुछ लोग उसके कमरे में जुआ खेलते थे, जब से ऑनलाइन खेलों ने गति पकड़ी थी, उसकी किराए की आय बहुत कम हो गई थी, अब वो बहुत खुश है, लोग वापिस उसके कमरों में आकर जुआ खेलेंगे।

शहर के कुछ होटल आसानी से जुआ खेलने के लिए सस्ते कमरे उपलब्ध करवा देते थे, वो लोग भी अब बहुत खुश हैं। पुलिस वालों की परेशानी अवश्य बढ़ जाएगी, क्योंकि इन जुआ खेलने वालों को पकड़ना पड़ेगा, ऑनलाइन खेलने वालों से उनको कोई परेशानी नहीं थी। सरकारी कार्यालयों की वर्किंग में भी जबरदस्त सुधार होने की पूरी संभावना बन रही हैं।

बैंकों को भी अब अधिक नगद राशि हमेशा तैयार रखनी पड़ेगी, ताकि जुआरियों को सप्लाई बनाई रखी जाय। बैंक स्टाफ भी अब फ्रॉड कम कर देगा, क्योंकि उनका स्टाफ भी तो अब ऑनलाइन गेम से वंचित हो जाएगा।

ऑनलाइन गेम में बैंक खाते से ही राशि निकलती थी, जिससे एक नंबर की पूंजी भी कम हो रही थी। जुआ तो दो नंबर की राशि से ही खेला जा सकता है।

उपयोग किया हुआ, घरेलू सामान अब सस्ते में बिका करेगा। जूए में जब पैसे खत्म हो जाते है तो सबसे पहले घर का सामान ही तो बिकता हैं।

मोहल्ले के सुने या आधे बने हुए मकानों में फिर रौनक लौट आएगी। छोटे जुआरी वही बैठ कर जुआ खेल सकेंगे।

आप सबके मन में भी बहुत सारे विचार इस बाबत आ रहें होंगे। यदि उचित समझें तो सांझा कर देवें, इंतजार रहेगा।

© श्री राकेश कुमार

संपर्क – B 508 शिवज्ञान एनक्लेव, निर्माण नगर AB ब्लॉक, जयपुर-302 019 (राजस्थान)

मोबाईल 9920832096

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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