श्री राकेश कुमार
(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)
☆ आलेख # १४७ ☆ देश-परदेश – International Sudoku Day: 9th September ☆ श्री राकेश कुमार ☆
हमारे बचपन में ये “पहेली” हल करने वाली किताबें या पत्रिकाएं नहीं हुआ करती थी। घर के बुजुर्ग अवश्य गणित, सामाजिक और व्यवहारिक विषयों पर पहेलियां बुझाते थे।
शेर, बकरी और घास को नाव में कैसे ले जा सकते हैं, जैसी समस्या का समाधान बताना पड़ता था। हरी थी, मन भरी थी, राजा जी के बाग में दुशाला लिए खड़ी थी। कौन सी वस्तु है ? मक्का या भुट्टा इसका उत्तर देना पड़ता था।
दस सेब को छह लोगों में कैसे बराबर बांट सकते है, जैसे प्रश्न पूछ कर गणित जैसे जटिल विषय की परख की जाती थी। ये सुडोकू द्वारा गणित विषय की बुद्धिमता का पैमाना तो अस्सी के दशक के आरम्भ हुआ था।
आज वर्ष के नौवें माह की नौवीं तारीख़ है, इसीलिए सुडोकू जिस को भी 9 x 9 के कॉलम में खेला जाता हैं। इसीलिए आज के दिन ही जापान में ये खेलना आरंभ हुआ था।
इस खेल में पेंसिल और रबर की आवश्यकता भी होती हैं। अंक या शब्द लिखते समय गलती को सुधारा जा सकें। समाचार पत्र में प्रतिदिन सुडोकू खेलने के लिए ही अनेक लोग पेपर खरीदते हैं, वर्ना उनको पेपर से कोई लेना देना नहीं होता हैं। अब तो मोबाइल में भी सुडोकू उपलब्ध हैं। शब्द ज्ञान में वृद्धि करने के लिए ” वर्डकू” खेला जा सकता हैं। अंग्रेज़ी के अलावा स्थानीय भाषा में भी खूब खेला जाता हैं।
मानसिक एकाग्रता बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा खेल है। आप अकेले ही खेलते हैं, कोई साथी की आवश्यकता नहीं होती हैं। विगत कुछ वर्षों से सोशल मीडिया के बुखार के कारण, इस खेल से लोग दूरी बना लेते हैं। बॉलीवुड के सितारे और क्रिकेट के खिलाड़ी भी इसका प्रचार नहीं करते हैं। वर्तमान में लोग चंचलता को अधिक तरजीह देते हैं। व्हाट्स ऐप और ऐ आई के फर्जी वीडियो देखने का नशा जो परवान चढ़ चुका है।
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© श्री राकेश कुमार
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