श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’

(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी की सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’ जी द्वारा “व्यंग्य से सीखें और सिखाएं” शीर्षक से साप्ताहिक स्तम्भ प्रारम्भ करने के लिए हार्दिक आभार। आप अविचल प्रभा मासिक ई पत्रिका की  प्रधान सम्पादक हैं। कई साहित्यिक संस्थाओं के महत्वपूर्ण पदों पर सुशोभित हैं तथा कई पुरस्कारों/अलंकरणों से पुरस्कृत/अलंकृत हैं। आपके साप्ताहिक स्तम्भ – व्यंग्य से सीखें और सिखाएं  में आज प्रस्तुत है एक विचारणीय रचना अधर्म पर धर्म की विजय: सोन पत्ते का उपहार। इस सार्थक रचना के लिए श्रीमती छाया सक्सेना जी की लेखनी को सादर नमन। आप प्रत्येक गुरुवार को श्रीमती छाया सक्सेना जी की रचना को आत्मसात कर सकेंगे।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  – आलेख  # २६० ☆ अधर्म पर धर्म की विजय: सोन पत्ते का उपहार 

वृक्ष को प्रत्यक्ष देव मानते हुए भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म, प्रकृति से जोड़कर अपने सभी पर्व मनाता है। चाहे, होली, नवरात्रि, दशहरा, सावन, कजरी आदि।

नदियों, पहाड़ों, पौधों सभी को जीवंत स्वरूप मानते हुए उन्हें पूजा जाता है। भाव -भक्ति, आस्था, विश्वास हमें पर्यावरण से जोड़ता है।

दशहरे में सोनपत्ता – (कचनार के पत्ते को)

दशहरे (विजयादशमी) पर सोन पत्ते का आदान-प्रदान, सोना बांटने का प्रतीक, यह सुख, वैभव, धन, सौभाग्य और मित्रता को दृढ़ करता है। मान्यता है कि ये पत्ते अक्षय धन और समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

पर्यावरण की चेतना- इससे प्रकृति और पर्यावरण के मध्य समन्वय बनता है। इस दिन नीलकंठ के दर्शन, शिव पूजा जिसमें शमी के पत्ते को भगवान भोलेनाथ को चढ़ाते हैं। यह पेड़ रेगिस्तानी क्षेत्रों में भी हरा-भरा रहता है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है। इसे दशहरे पर पूजा कर संरक्षण की परंपरा है, जिससे लोग पेड़ों को बचाते हैं।

सोना के रूप में पत्तों का आदान-प्रदान प्राकृतिक संसाधनों की महत्ता को दर्शाता है। असली धन प्रकृति ही है। प्रकृति संग उत्सव मनाने से जीवन में उमंग आती है। दशहरा बुराई पर अच्छाई का प्रतीक है। रावण दहन करके हर बार यही संदेश दिया जाता है कि बुराई को मिलकर इसी तरह दहन करना चाहिए। साथ ही हमें ये जनचेतना फैलाना चाहिए कि प्रदूषण, अंधाधुंध वृक्षों को काटना रोकना होगा।

आइए हम संकल्प लें कि दशहरे को पूरे धूमधाम के साथ प्रकृति संरक्षण की ओर अग्रसर होंगे।

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©  श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’

माँ नर्मदे नगर, म.न. -12, फेज- 1, बिलहरी, जबलपुर ( म. प्र.) 482020

मो. 7024285788, chhayasaxena2508@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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Chhaya saxena

दशहरे की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ