श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”
(सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” जी का हिन्दी बाल -साहित्य एवं हिन्दी साहित्य की अन्य विधाओं में विशिष्ट योगदान हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचना सहित 145 बालकहानियाँ 8 भाषाओं में 1160 अंकों में प्रकाशित। प्रकाशित पुस्तकेँ-1- रोचक विज्ञान कथाएँ, 2-संयम की जीत, 3- कुएं को बुखार, 4- कसक, 5- हाइकु संयुक्ता, 6- चाबी वाला भूत, 7- बच्चों! सुनो कहानी, इन्द्रधनुष (बालकहानी माला-7) सहित 4 मराठी पुस्तकें प्रकाशित। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी का श्री हरिकृष्ण देवसरे बाल साहित्य पुरस्कार-2018 ₹51000 सहित अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित व पुरस्कृत। साप्ताहिक स्तम्भ “श्री ओमप्रकाश जी का साहित्य” के अंतर्गत साहित्य आप प्रत्येक गुरुवार को आत्मसात कर सकते हैं। आज प्रस्तुत है आपका आलेख “पर्यटन – एलोरा का धर्मराजेश्वर मंदिर”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्री ओमप्रकाश जी का साहित्य # २२५ ☆
☆ पर्यटन- एलोरा का धर्मराजेश्वर मंदिर ☆ श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆
अजंता, एलोरा, धर्मनार की गुफाएं हो या यहां के मंदिर, सभी एक ही शैल को तराश कर बनाए गए हैं। इस कारण ये अलौकिक वास्तुशिल्प के सर्वोत्कृष्ट नमूने, पच्चीकारी की बारिश शैली की उन्नत तकनीक और भारतीय वास्तु निर्माण शैली की वैज्ञानिक विधि को दर्शाते हैं। इसी कारण देश-विदेश के पर्यटक इन्हें निहारने, इनकी कला को अपने दिल दिमाग में बैठाने, भारतीय वास्तु शैली को दिलों में सजौने आते हैं। ताकि वह गर्व के साथ बता सके कि भारतीय प्राचीन परंपरा व यहां की वास्तु निर्माण शैली कितनी सर्वोत्कृष्ट थी।
अजंता एलोरा की श्रंखला वहीं तक सीमित नहीं है। यह मंदसौर जिले के चंदवासा के धमनार तक फैली हुई है। यहां की चंदन की पहाड़ियों में अजंता के कैलाश मंदिर की तरह धर्मराजेश्वर का मंदिर उत्कीर्ण है। दोनों ही मंदिर शैल उत्कृष्ट शैली पर बने हुए हैं।
इसे अंग्रेजी में इंडियन रॉक कट आर्किटेक्चर कहते हैं। हिंदी में किसी विशेष चट्टान को तराश कर बनाया गया वास्तुशिल्प कहते हैं। इसकी विशेषता यह होती है कि इसे एक ही चट्टान को तराश कर खोदा जाता है। तत्पश्चात उसे मंदिर का रूप दिया जाता है। इसे ही शैल उत्कीर्ण वास्तुकला कहते हैं।
भारत में अजंता-एलोरा के साथ-साथ धमनार की गुफाएं इसी शैली में बनी हुई है। यह मानव द्वारा निर्मित वास्तु कला का अदभुत, अनोखा व उत्कृष्टता का बेहतरीन नमूना है। इसे देखने के लिए लाखों लोग यहां पर्यटन करने आते हैं।
पर्यटन के आकाश में अजंता एलोरा की गुफाएं व मंदिर तो दिखाई देते हैं मगर इसी शैली में मंदसौर जिले में बने धमनार का धर्मराजेश्वर मंदिर का कहीं नाम नहीं आता है। यह सदा से ही उपेक्षित रहा है।
भारत के ह्रदय में बसे मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले की शामगढ़ तहसील में धमनार की गुफाओं के पास धर्मराजेश्वर मंदिर उत्कीर्ण है। यह मंदिर चंदन की पहाड़ियों को तराश कर बनाया गया है। एक ही शैल पर उत्कीर्ण मंदिर उत्तर भारतीय नागरी शैली में बना हुआ है। जबकि कैलाश मंदिर दक्षिण भारतीय द्रविण शैली में निर्मित है।
कैलाश मंदिर की तरह तरह धर्मराजेश्वर मंदिर के प्रांगण में मुख्य मंदिर के साथ-साथ 7 लघु मंदिर उत्कीर्ण कर बनाए गए हैं। यहां का मुख्य मंदिर पहले विष्णु मंदिर था बाद में इसे शिव मंदिर में परिवर्तित कर दिया गया। मुख्य मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग तथा द्वार के प्रस्तर पर विष्णु की प्रतिमा उत्कीर्ण है।
यह मंदिर 14.53 मीटर और 10 मीटर चौड़ाई में बना हुआ है। इस मंदिर में द्वार मंडप, सभा मंडप, अर्ध मंडप, गर्भ गृह और कलात्मक शिखर निर्मित है। इसका शिखर उन्नत तथा कलश युक्त है। मुख्य द्वार पर भैरव व भवानी की प्रतिमा उत्कीर्ण है।
इस मंदिर के साथ-साथ 7 लघु मंदिर है। इसमें वराह, दशावतार, शेषषायी, विष्णु, पंचमहादेवी आदि की मूर्तियां उत्कीर्ण है।
आठवीं व नौवीं शताब्दी में प्रतिहार राजवंश द्वारा इसका निर्माण किया गया था। यहां प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि पर मेला का आयोजन किया जाता है। यह पूरा मंदिर 104 गुणित 67 फिट की लंबाई चौड़ाई के साथ 30 फीट गहरी चट्टान को तराश कर बनाया गया है। इसी मंदिर के पास अजंता एलोरा की तरह 50 गुफाएँ निर्मित की गई है। यह अजंता एलोरा की शैलियों और उसी उद्देश्य पर बनाई गई है।
इस पर्यटन स्थल पर मंदसौर, शामगढ़ भानपुरा से ट्रेन बस द्वारा जाया जा सकता है। शामगढ़ से 22 किलोमीटर दूर और गरोठ से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चंदवासा गांव से 3 किलोमीटर की दूरी पर धमनार स्थित है। यहीं धर्मराजेश्वर मंदिर बना हुआ है।
यहां तक पहुंचने के लिए इंदौर, भोपाल, उदयपुर, कोटा से हवाई जहाज द्वारा पहुंचा जा सकता है। विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर मंदसौर से 122 किलोमीटर दूर, चंबल, गांधी सागर से पास में यह स्थान स्थित है। यहां बस, ट्रेन और निजी साधनों से जाया जा सकता है।
© श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”
27-01-2023
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