श्रीमती सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
(संस्कारधानी जबलपुर की श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’ जी की लघुकथाओं, कविता /गीत का अपना संसार है। साप्ताहिक स्तम्भ – श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य शृंखला में आज प्रस्तुत है सामाजिक विमर्श पर आधारित विचारणीय लघुकथा “रिटायरमेंट”।)
☆ श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य # २४५ ☆
🌻लघु कथा🌻 रिटायरर्मेंट 🌻
(पुरस्कृत लघुकथा)
अभी घनश्याम बाबू रिटायरर्मेंट होकर घर पहुंच भी नहीं पाये थे। आलमारी में सहेजे गये मेगजीन, पुराने अखबार को बाहर दालान पर ढेर लगा दिया गया था।
हँसते मुस्कुराते चेहरे का रंग अचानक श्वेत होता चला,
सच तो है अब उन पुरानेअखबारों को कौन देखेगा, जिसमें कभी परीक्षा परिणाम देखने की होड़ लगी होती थी।
पापाजी अच्छे दामों से ले रहा कवाड वाला। अब अलमारी में सोनू अपनी किक्रेट मैच का सामान रख लेगा।
शायद अखबार भी रिटायर हो चला।
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© श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






