श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी की सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’ जी द्वारा “व्यंग्य से सीखें और सिखाएं” शीर्षक से साप्ताहिक स्तम्भ प्रारम्भ करने के लिए हार्दिक आभार। आप अविचल प्रभा मासिक ई पत्रिका की प्रधान सम्पादक हैं। कई साहित्यिक संस्थाओं के महत्वपूर्ण पदों पर सुशोभित हैं तथा कई पुरस्कारों/अलंकरणों से पुरस्कृत/अलंकृत हैं। आपके साप्ताहिक स्तम्भ – व्यंग्य से सीखें और सिखाएं में आज प्रस्तुत है एक विचारणीय रचना “ग्रीन मोटिवेशन: अगहन गुरुवार का आधुनिक संदेश…”। इस सार्थक रचना के लिए श्रीमती छाया सक्सेना जी की लेखनी को सादर नमन। आप प्रत्येक गुरुवार को श्रीमती छाया सक्सेना जी की रचना को आत्मसात कर सकेंगे।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – आलेख # २६५ ☆ ग्रीन मोटिवेशन: अगहन गुरुवार का आधुनिक संदेश… ☆
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पौधे लगाएँ आप ढेरों, भावना मंगल करें।
फैली यहाँ हरियालि देखो, पीर मन की जो हरें।
सारे करेंगे अनुसरण तो, श्रेष्ठ होगी कल्पना।
द्वारे सजेंगे आम्र पत्ते, भव्य होगी अल्पना।।
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आज जब दुनिया पेड़ों को खो रही है, अगहन का गुरुवार हमें अपनी जड़ें याद दिलाता है। यह दिन एक तरह से प्रकृति की पुकार है, जैसे धरती नरम आवाज में कहती हो: “मेरी देखभाल भी पूजा का हिस्सा है।”
इस वर्ष अगहन मास (मार्गशीर्ष मास) 6 नवंबर 2025 को आरंभ हुआ है।
- पौधरोपण की शुभ शुरुआत
लोग मानते हैं कि इस दिन लगाया गया पौधा घर में शांति और स्थिरता लाता है। आप इस अवसर पर अपने घर, मोहल्ले या खेत की किनारियों पर एक पौधा अवश्य लगाइए।
यह पौधा आने वाले समय में आपकी मेहनत, धैर्य और उम्मीदों का एक जीवित रूप बन जाता है।
- परिवार को ‘ग्रीन संकल्प’ दिलाएँ
एक छोटा-सा संकल्प बनाया जा सकता है—
- हर महीने एक पौधा
- पानी की बचत
- किचन वेस्ट से खाद
- प्लास्टिक का कम उपयोग
अगहन गुरुवार इस संकल्प को शुरू करने का शांत और पवित्र बनाइए।
- धान कटाई और कृतज्ञता का संदेश
किसानों के लिए यह महीना धरती द्वारा दिया गया उपहार है। ग्रीन मोटिवेशन यही कहता है कि उपहार को लौटाना भी जरूरी है—
थोड़ा पानी बचाकर, थोड़ी छाँव उगाकर, थोड़ा हरापन फैलाकर।
- सोशल मीडिया पर सकारात्मक हरियाली
डिजिटल प्रयास करें…
- एक पौधा लगाने का छोटा वीडियो
- अपने आँगन की हरियाली दिखाएँ
- अगहन गुरुवार का ‘धीमा, शांत और हरा’ संदेश शेयर करें।
इससे यह पर्व केवल कैलेंडर का हिस्सा नहीं, बल्कि जीवन में ताजगी भरने का दिन बनेगा।
अगहन गुरुवार को परंपरा की पीली रोशनी और हरियाली की ठंडी छाया से सराबोर करते हुए आगे बढ़ें। इस दिन की सुंदरता यही है कि यह मन को शांत करता है और धरती से जोड़े रखता है। और जब मन और मिट्टी दोनों मुस्कुराएँ, तभी जीवन सच्चे अर्थों में समृद्ध होता है।
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© श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’
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≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




