आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है  – सामयिक गीत – पुरुष दिवस)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २५७ ☆

☆ सामयिक गीत – पुरुष दिवस ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

सामयिक गीत – पुरुष दिवस

पुरुष दिवस है

खैर मना नर

नारी की जयकार कर।

माँ, बहिना,

बीबी-बेटी को

कर प्रणाम, खैरात वर।।

.

भाभी, साली, सरहज

सम्मुख पड़े दिखाई

झट झुक जा।

काया माया छाया

मग में मिले

कदम तुरतई रुक जा।

नमन भवानी

कह वंदन कर

खुद पर ही उपकार कर।

पुरुष दिवस है

खैर मना नर

नारी की जयकार कर।

.

शारद-रमा-उमा की

जगकर जय कह

तब ही खैर है।

सिर न उठाना

मिले न खाना

खुद से खुद क्या बैर है?

उनको दे दे

हृदयासन तू

खुद को बंदनवार कर।

पुरुष दिवस है

खैर मना नर

नारी की जयकार कर।

.

जब तक राजी

तब तक काजी

बाल न बाँका कर सकता।

गर नाराजी

हर दिन भाजी

खा बिन मारे ही मरता।

पग-रज लेकर

शीश लगा झट

खुद पर खुद उपहार कर।

पुरुष दिवस है

खैर मना नर

नारी की जयकार कर।

©  आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

१९.११.२०२५

संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,

चलभाष: ९४२५१८३२४४  ईमेल: salil.sanjiv@gmail.com

 संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments