श्री राकेश कुमार

(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ  की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” ज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)

☆ आलेख # १५५ ☆ देश-परदेश – साइबर क्राइम ☆ श्री राकेश कुमार ☆

उपरोक्त पेपर क्लिपिंग्स, व्हाट्स ऐप के माध्यम से प्राप्त हुई। आज रविवार को प्रातः कालीन साप्ताहिक साथियों से चर्चा का दिन हैं, इसीलिए आज एक एस बी आई बैंक अधिकारी के साथ हुए साइबर क्राइम पर ही केन्द्रित था।

जबलपुर निवासी श्री अनिल जी ननहोरिया ने विगत 22 नवंबर 2025 को 76 लाख गवां दिए हैं। साथियों ने फ्रॉड आदि से बचने के लिए अपने अपने विचार प्रस्तुत किए, जोकि आपके विचारार्थ निम्नानुसार हैं। आप के मन भी अवश्य कुछ ना कुछ विचार आ रहें होंगे, चाहें तो सब के लिए सांझा कर सकते हैं।

एक साथी ने बताया कि बैंक खाते के लिए एक अलग मोबाइल कनेक्शन रखना चाहिए। जिसकी जानकारी किसी को भी नहीं देवें।

एक दूसरे साथी ने जानकारी दी कि सभी बैंक खाते (FD,SB आदि) पत्नी के साथ Joint operation में करवा लेवें।

एक साथी ने तो ये भी कह दिया कि अधिकतम बचत राशि को बच्चों के नाम कर देवें, और भजन करें।

कहने वाले तो ये भी कहने लगे कि सोना खरीद कर लाकर में रख देना चाहिए, दिन दोगुना रात चौगुना महंगा हो जाएगा। एक और साथी लपक कर बोले, जमीन खरीद कर रख दो, ताकि कोई रंगदार कब्जा कर लेवें।

अंत में एक साथी ने कबीर का दोहा ” पूत सपूत तो क्यों धन संचय, पूत कपूत तो क्यों धन संचय” सुना कर आज सभी साथियों के चाय नाश्ते का बिल भर कर अपने कथन को प्रमाणित कर दिया।

© श्री राकेश कुमार

संपर्क – B 508 शिवज्ञान एनक्लेव, निर्माण नगर AB ब्लॉक, जयपुर-302 019 (राजस्थान)

मोबाईल 9920832096

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments