श्रीमती सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
(संस्कारधानी जबलपुर की श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’ जी की लघुकथाओं, कविता /गीत का अपना संसार है। साप्ताहिक स्तम्भ – श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य शृंखला में आज प्रस्तुत है सामाजिक विमर्श पर आधारित विचारणीय लघुकथा “आम के बीच राम”।)
☆ श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य # २५४ ☆
🌻लघु कथा🌻आम के बीच राम🌻
वार्षिकोत्सव कार्यक्रम चल रहा था। सभी अपनी-अपनी कार्य कुशलता मंच के मध्य रखना चाह रहे थे। चमचमाता मंच, सजावट, तिलक रोली चंदन वंदन अभिनंदन, मन आनंदित और उमंगों से भरा ।
सभी की निगाहें तो बस वहाँ क्या हो रहा? क्या होने वाला है? इसकी जानकारी लेते नजर आए।
किसी ने मन की बात, कोई व्यंग, कोई परियंत, कोई प्रियवर, कोई हँसी ठिठोली, कोई ज्ञान की बात, संत ध्यान की बात, न चाहते भी तालियाँ बजाते रहिए। कुल मिलाकर गीत संगीत भरपूर मनोरंजन।
अंग्रेजी परवरिश में पलते आज के बच्चों को ये सब नही भाता।अथर्व अपनी दादी के साथ आया था। बीच-बीच में तंग करने लगा – – घर चलो यहाँ तो आम लोग बैठे है।
दादी प्यार से सिर पर हाथ फेरते बच्चे से बोली — जहाँ आम लोग होते है। वहीं राम होते है। तुम्हें भी श्री राम बनना है न??
बच्चे ने धीरे से कहा — तो फिर ठीक है। थोड़ी देर बैठ जाता हूँ।
राम ही केवल राम पियारा।
जान लेही जो जान निहारा।।
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© श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






