श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”
संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध एवं सजग अग्रज साहित्यकार श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” जी के साप्ताहिक स्तम्भ “मनोज साहित्य ” में आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “नारी तेरी अजब कहानी”। आप प्रत्येक मंगलवार को आपकी भावप्रवण रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे।
मनोज साहित्य # २११ – नारी तेरी अजब कहानी ☆
☆
नारी तेरी अजब कहानी,
आँचल से तो दूध पिलाती,
पर आँखों से बहता पानी।
नारी तेरी अजब कहानी…
*
बचपन में तो उछल कूदती,
घर आँगन में दौड़ लगाती।
देहरी के बाहर जाते ही-
अविरल आँसू रोज बहाती।
नारी तेरी अजब कहानी…
*
अगनी में जब चाहे जलती,
तेजाबों से रोज नहाती।
सदियों से तू भोग रही है,
प्रतिक्षण हिंसक नई कहानी।
नारी तेरी अजब कहानी…
*
अग्नि परीक्षा देते देते,
सदियाँ बीत गयी हैं तुझको।
अंगारों पर फिर भी चलती,
अपने मुख से उफ् न करती।
नारी तेरी अजब कहानी…
*
हर समाज है शोषण करता,
अधिकारों से वंचित रखता।
कर्तव्यों का पाठ बताकर,
तोते सा पिंजड़े में रखता।
नारी तेरी अजब कहानी…
*
धर्म के आगे तू हलाल है,
मानवता भी शर्मसार है।
आजादी अभिव्यक्ति नाम पर,
अब भी बुर्कों में जकड़ी है।
नारी तेरी अजब कहानी…
*
कुछ बोला तो तीन शब्द में,
जब चाहे बनवास घड़ी है।
परिवर्तन की हर आँधी से
कब से कोसों दूर खड़ी है।
नारी तेरी अजब कहानी…
*
चीर हरण अब भी होते हैं,
भीष्म द्रोण दुबके बैठे हैं।
भोग्या बनकर भोग रही है,
आदम युग से वही कहानी।
नारी तेरी अजब कहानी…
*
आँचल से तो दूध पिलाती,
पर आँखों से बहता पानी।
नारी तेरी अजब कहानी…
☆
© मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”
संपर्क – 58 आशीष दीप, उत्तर मिलोनीगंज जबलपुर (मध्य प्रदेश)- 482002
मो 94258 62550
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





