सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीत – जीवन में उद्धार है…।
रचना संसार # ९२ – गीत – जीवन में उद्धार है… ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
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मानव आप अहं को तजिए,
वह तो एक विकार है।
क्रोध मोह को तज दोगे तब,
जीवन में उद्धार है।।
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रावण अत्य अंहकारी था ,
करता वो अभिमान था।
माँ सीता का हरण किया था,
बहुत बड़ा नादान था।।
तोड़ा दर्प राम ने उसका,
रख लो मानव ध्यान भी।
मारा प्रभु ने रण में उसको,
सकल जगत को ज्ञान भी।।
धूल अहंकारी हैं मिलते,
करिए आप विचार है।
*
मिट्टी की तो काया है यह,
दूर रहो तुम पाप से।
मानवता के सेवक बन जा,
नित्य डरो संताप से।।
अहंकार है दंश साँप का,
परम शत्रु है प्राण का।
जीवन में वह जहर घोलता ,
काल बने हैं त्राण का।।
करे खोखला दीमक जैसा,
अहंकार अंगार है।
*
मात-पिता का आदर कर लो,
उनका नित सम्मान हो।
प्रेम पंथ पर नित्य चलो तुम,
धर्म कर्म संज्ञान हो।।
अहम् भाव में मत खोओ तुम,
उन्नति में व्यवधान है।
गरल पियो मत इसका सुन लो,
खो जाता सब मान है।।
अहंकार का नाम बुरा है ,
जीवन होता भार है।
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© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)
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