डॉ.राजेश ठाकुर
( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का मंतव्य उनके ही शब्दों में – “पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “शेखी…“.)
साप्ताहिक स्तम्भ ☆ नेता चरित मानस # २९
कविता – शेखी… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
=1=
ना जान-बूझकर ज़ुबान हारिये हुज़ूर
शेखी न शेखचिल्ली सी बघारिये हुजूर
=2=
वादाखिलाफी शौक़ पसंदीदा आपका
मुद्दे जन-हितों के न नकारिये हुज़ूर
=3=
मुकरना बदल जाना फ़ितरत है आपकी
अब मुखौटा नकली ये उतारिये हुज़ूर
=4=
जितनी बड़ी हो आपकी औकात की चादर
पाँव अपने उतने ही पसारिये हुजूर
=5=
ग़र देखना है आँगन अमराई सुहानी
सुदूर किसी गाँव में पधारिये हुजूर
=6=
गंगा में डुबकियों से,यूँ न पाप धुलेंगे
मन को भी संस्कार में पखारिये हुजूर
=7=
मानकर रहनुमा चुना हमने आपको
उम्मीदें आम जन की न डकारिये हुज़ूर
=8=
तुनक़मिज़ाज़ होना बात-बात पे गुस्सा
वक़्त रहते आदतें सुधारिये हुजूर
=9=
लहज़ा नरममिज़ाज़ हो दरियादिली दिखे
शख़्सियत को अपनी यूँ निखारिये हुजूर
=10=
कुछ तो काम कीजिये आवाम के लिए
मुसीबतों से देश को उबारिये हुज़ूर
=11=
जीने न देगी आपको ख़ामोशमिज़ाज़ी
नये दौर में ‘राजेश’ सच उघारिये हुजूर
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© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
शासकीय कॉलेज़ केवलारी
संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071
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