श्री श्याम खापर्डे
(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “सीने मे आग है…”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २६४ ☆
☆ # “सीने मे आग है…” # ☆
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सीने में आग है
आंखों में शोले है
कलम ने बगावत की
शब्द बारूद के गोले है
शब्द चुभो रहे हैं खंजर
जो बन गए हैं बंजर
उन मुर्दा इंसानों के
दिल के दरवाजे खोले हैं
जो गूंगे बहरे थे
जिस्म के जख्म गहरे थे
वह तड़प के जाग उठे
वह चिल्ला के धावा बोले है
जब हाथों में हाथ मिले
संघर्षों में साथ मिले
उनके हुंकारों को सुनकर
सिंहासन डोले है
वनों को काट दिया
सरमायेदारों में बांट दिया
निहत्थों ने कुल्हाड़ी उठाई तो
बोले यह कहां अब भोले हैं
शरीर पर लंगोटी है
कैसी किस्मत खोटी है
भूख के फाके हैं
अस्मत बाजार में तोले हैं
हर गरीब की यही कहानी है
आंखों से बहता पानी है
सैलाब ना आ जाए कहीं
टूट रहे बांधों के ताले हैं
झूठ की कश्ती पर
पाखंड की थामे पतवार
गंगा में डुबकी लगाकर
कहते हैं पाप धोले हैं/
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© श्याम खापर्डे
फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो 9425592588
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





