डॉ.राजेश ठाकुर
( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का मंतव्य उनके ही शब्दों में – “पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “तो जानें…“.)
साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # ४५
कविता – तिरंगा… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
घर-घर तिरंगा
हर घर तिरंगा
गंगा जमुना तहज़ीब ,
देश भक्ति की तरक़ीब
हिमाक़त न करे लेने कोई इण्डिया से पंगा ll
घर-घर…
सबका प्रयास हो,सबका विकास हो,
सबका विश्वास हो,न कोई निराश हो
अनुगूँज वन्दे मातरम बनाये भला-चंगा ll
घर-घर…
जन-गण मालामाल हो
जय भारत ख़ुशहाल हो
देश प्रेम ताल हो,हर कोई निहाल हो
ज्यों लहर निर्मल पावन हर गंगा ll
घर-घर…
मज़दूर या किसान हो, भारत का स्वाभिमान हो
तिरंगा निशान हो तुम आन बान शान हो
हरा श्वेत केसरिया से मन सबका रंगा
हर घर…
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© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
शासकीय कॉलेज़ केवलारी
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