सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीत – साहित्य…।

? रचना संसार # ११६ ?

☆ गीत – साहित्य…  ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’ ? ☆

☆

समाज का दर्पण सदा, श्रेष्ठ साहित्य जान।

 विकास इसका कीजिए, कवि तुम बनो महान।।

*

छंद रचो कविता लिखो, गीत हित हों समाज।

बडी जरुरत वीर रस की, देखो होती आज।।

*

जगा रहा समाज सदा, कविवर देकर ज्ञान ।

विद्या सागर है बना, सूर देत पहचान ।।

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आया नया प्रभात है, कलम बनी रसधार।

कविवर सींचत प्रेम को, मानत नहिं वो हार।।

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हर युग मे कवि ने किया, देखो बडा कमाल।

कभी लिखा  श्रृँगार है, फिर है बदली चाल ।।

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कलम तलवार है बनी, पैनी इसकी धार।

  प्रहरी बनी  समाज की, विकास का है द्वार।।

*

बडा नाम साहित्य मे, देखो तुलसीदास।

राम चरित मानस लिखा, किया धरती उजास ।।

*

कृष्ण लीला दिखा रहे, महा कवि सूरदास ।

मीरा दीवानी हैं बनी, हिय कान्हा का वास ।।

*

प्रताप ऐसा लेखनी, जगे सोता समाज।

वीर रस के प्रभाव से, बजते टूटे साज।।

*

झूठ से वह दूर रहे, सच की है भरमार ।

अविरल बहती गंग सी, साहित्य अमृतधार।।

☆

© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)

संपर्क –1308 कृष्णा हाइट्स, ग्वारीघाट रोड़, जबलपुर (म:प्र:) पिन – 482008 मो नं – 9424669722, वाट्सएप – 7974160268

ई मेल नं- meenabhatt18547@gmail.com, mbhatt.judge@gmail.com

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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